वन कर्मियों ने किया घटनास्थल का मुआयना
गुलरा टांडा में रविवार सुबह घास चर रहे घोड़े को बाघ ने गुलरा वन चौकी के पास निवाला बना लिया। पार्क कर्मियों ने मौका मुआयना कर शव को दफना दिया।
गुलरा टांडा निवासी सोनिया बंजारा ने रविवार को सुबह करीब पांच बजे घोड़े को चरने के लिए छोड़ा था। गांव के समीप ही पार्क की चौकी के सामने चकरोड पर सुबह करीब छह बजे कई लोग लघुशंका के लिए जा रहे थे तभी उनकी नजर घोड़े को पीछे से खा रहे बाघ पर पड़ी तो उनके हाथ पांव फूल गए और सभी जान बचाकर उल्टे पांव भाग खड़े हुए। वन चौकी से महज सौ मीटर की दूरी पर घटना होने से तत्काल वहां तैनात दरोगा वीरबहादुर सिंह, उमाशंकर पाल और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव, वॉचर नसीबे, आस मोहम्मद, संजय आदि पहुंच गए। मौका मुआयना कर उन्होंने घोड़े के शव को दफना दिया। सहायक परियोजना अधिकारी ने उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पशु मालिक को तात्कालिक सहायता के तौर पर 15 सौ रुपये दिए।
बाघ के हमले में भैंस घायल
बांकेगंज। मैलानी रेंज के जटपुरा बीट जंगल में बाघ ने भैंस पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। जंगल के अंदर मौजूद चरवाहों के शोर मचाने पर बाघ भैंस को छोड़ कर चला गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी है। जटपुरा बीट जंगल से सटे गांव बरौंछा निवासी राम नरायन की भैंस पनसब्बी कंपार्टमेंट 2 में चराने के लिए चरवाहे जंगल लेकर गए थे। जहां झाड़ियों में बैठे बाघ ने भैंस पर हमला कर कर उसे गंभीर घायल कर दिया। उस दौरान वहां मौजूद चरवाहों के शोर मचाने पर बाघ भैंस को छोड़कर चला गया। बाघ के हमले से घायल हुई भैंस को पशु स्वामी इलाज के लिए बांकेगंज पशु चिकित्सालय ले गया। जहां डॉ रविकांत वर्मा ने भैंस का उपचार किया। उधर जटपुरा फारेस्ट गार्ड सुखपाल सिंह ने जंगल के अंदर भैंस पर बाघ के हमले की पुष्टि की है।