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बाघ हमले में घायल तीनों ग्रामीणों की हालत में सुधार,एक डिस्चार्ज

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हमलावर बाघ की निगरानी करती वन कर्मियों की टीम। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज जंगल के रास्ते पर बाघ के हमले में घायल हुए तीनों ग्रामीणों की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। इनमें से एक युवक को जिला अस्पताल से छुट्टी भी देदी गई है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज की छैरासी बीट कंपार्टमेंट 13 जंगल में गुरुवार सुबह तीन बाइक सवार राहगीरों पर बाघ ने हमला कर दिया था। इस हमले में घायल दो युवकों बांकेगंज ब्लॉक की पंचायत ग्रंट नंबर तीन के सीतारामपुर गांव निवासी रवी कुमार (20) और उसके रिश्तेदार छैरासी गांव निवासी विशाल (16) को ग्रामीणों ने बांकेगंज सीएचसी में भर्ती कराया था। इसके अलावा एक अन्य घायल गोला कोतवाली क्षेत्र के मलंगपुर गांव निवासी अनिल (36) को बिजुआ सीएचसी में भर्ती कराया गया। तीनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। जहां अनिल की हालत गंभीर देखते हुए उसे इलाज के लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। जहां उसकी हालत में सुधार है। जबकि सीतारामपुर गांव निवासी रवी कुमार का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। अपेक्षाकृत कम घायल छैरासी गांव निवासी विशाल के स्वस्थ होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। ग्रंट नंबर तीन के प्रधान राकेश चौधरी और रवी के पिता श्रीकृष्ण ने बताया बाघ हमले में घायल उसके पुत्र रवी की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। जबकि हमले में घायल उनका रिश्तेदार के स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज की छैरासी बीट जंगल में बाघ हमले में घायल हुए तीनों ग्रामीणों की हालत में सुधार हो रहा है। इनमें से एक ग्रामीण स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
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- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन
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हमलावर बाघ की लगातार हो रही निगरानी
बाकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि गुरुवार सुबह भीरा रेंज की छैरासी बीट जंगल में बाघ ने तीन लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। इसके बाद हमलावर बाघ की निगरानी के लिए रेंजर राकेश बाबू वर्मा के निर्देशन में वन कर्मियों की कई टीमें गठित की गई है। निगरानी टीमें बाघ के मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कोशिश यह की जा रही है कि बाघ जंगल के बाहर या रास्तों की ओर न आने पाए। इसके अलावा ग्रामीणों को जागरुक किया जा रहा है कि वे सतर्कता बरतें, धरती के फूल (मशरूम), जलौनी लकड़ी और पालतू पशुओं को चराने के लिए जंगल में न जाएं। संवाद
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