मझगईं में बाघ के हमले में बाल-बाल बचे फूलचंद्र। संवाद
मझगईं। क्षेत्र के नौगवां कस्बे के एक घर में घुसकर सोमवार रात बाघ ने एक बछिया पर हमला कर उसे मार दिया। घर के बाहर जमीन पर सो रहे गृहस्वामी बाल-बाल बच गए।
कस्बा के छब्बापुरवा में पांच दिन पूर्व एक छुट्टा गाय पर हमला कर बाघ ने खेत में दौड़ा-दौड़ाकर मार डाला था। सोमवार रात को नौगवां कस्बा में जगदीश के घर घुस कर बाघ ने अंदर बंधी पालतू बछिया के मौत के घाट उतार दिया। मारने के बाद वहीं बैठ कर बछिया को खाता रहा। कुत्तों के भौंकने की आवाज से गहरी नींद से जागे परिवार वालों ने जब बाघ देखा तो उनके होश उड़ गए।
जमीन पर सो रहे गृहस्वामी के पिता फूलचंद्र के पास भी बाघ पहुंच गया और उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद बाघ वहां से भाग गया। उधर, ग्रामीणों का कहना है कि अगर कुत्ते भौंकते नहीं तो फूलचंद्र की भी जान जा सकती थी।
मझगईं रेंज अधिकारियों ने भी मौका मुआयना किया और बछिया के बचे हुए अवशेषों को गड्ढा खोदवाकर दफन कराया। रेंजर अंकित सिंह ने बताया कि बछिया को मारने वाले वन्यजीव की पुष्टि बाघ की न होने तेंदुए के रूप में हुई है। खाबर लगाने के साथ ही उसे कैद करने के लिए पिंजड़ा भी लगाया जाएगा। बराबर गश्त भी कराई जा रही है।
उधर इस बारे में जानकारों का मानना है कि वैसे वन्यजीव किसी भी मवेशी का शिकार करता है तो शव को घटनास्थल से खींचकर एकांत में ले जाकर खाता है, लेकिन नौगवां में बछिया के गले में मजबूत रस्सी बंधी होने के कारण बाघ उसको मारने के बाद ले नहीं जा सका तो वहीं बैठकर खाने लगा।
मझगईं में बाघ के हमले में बाल-बाल बचे फूलचंद्र। संवाद