पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में पार्क प्रशासन की ओर से हर साल कराई जाने वाली बाघों की गणना के कार्य में इस बार देर हो गई है। इसकी वजह फायर सीजन व बजट मिलने में देरी होना बताया जा रहा है।
एनटीसीए की ओर से जहां हर चार साल में बाघों की गणना का कार्य होता है। वहीं पार्क प्रशासन प्रति वर्ष बाघों की गणना कर आंकड़े एनटीसीए को भेजता है। पार्क के अधिकारी अक्तूबर-नवंबर में बाघों की गणना कराने की बात कह रहे हैं।
एनटीसीए, डब्ल्यूटीआई व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अलावा पार्क प्रशासन के सहयोग से हर चार साल में बाघों की गणना कराने का कार्य करता है। उसके बाद आंकड़े जारी किए जाते हैं। एनटीसीए उत्तर प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्वों में एक साथ गणना का कार्य कराता है, लेकिन दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन हर साल बाघों की गणना करते हुए उसकी रिपोर्ट एनटीसीए को भेजता है।
मार्च, अप्रैल व मई में गणना का कार्य होता है, लेकिन इस साल गणना में देरी हो गई है। इसका कारण फायर सीजन के अलावा अधिकारी बजट का अभाव भी बता रहे हैं। अब अक्तूबर-नवंबर में गणना कराए जाने की बात कही जा रही है। ऐसा इसलिए है कि मानसून सत्र को लेकर 15 जून को दुधवा बंद हो जाएगा और बारिश में दुधवा के रास्ते खराब हो जाते हैं। इसके चलते गणना का कार्य संभव नहीं हो सकेगा। मानसून सत्र निकलने के बाद दुधवा में बाघों की गणना करने की तैयारी पार्क प्रशासन कर रहा है।
हर साल होती है गणना, आंकड़े जारी करता है एनटीसीए
पार्क प्रशासन बाघों की गणना का कार्य हर साल करता है। गणना का कार्य यह देखने के लिए होता है कि दुधवा में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही हरै या फिर संख्या में ठीक प्रकार से इजाफा नहीं हो रहा है, गणना में जो भी नतीजे सामने आते हैं उसकी रिपोर्ट एनटीसीए को भेजी जाती है।
कैमरा ट्रिपिंग के जरिए की जाती है गणना
गणना कैमरा ट्रिपिंग के जरिए की जाती है। पगचिन्हों को देखकर उनकी तस्वीर खींचकर अन्य तस्वीरों से मिलान का काम भी पार्क प्रशासन करता है। कैमरा ट्रिपिंग में जिन इलाकों में बाघ ज्यादा रहते व दिखते हैं, वहां पर कैमरों को लगाया जाता है और वन्यजीवों के निकलने पर कैमरा आटोमैटिक तस्वीर खींच लेता है। जीपीएस के माध्यम से बाघों के इलाकों को रीड करने के बाद ही गणना का कार्य किया जाता है। लगाए गए कैमरों में चिप व मेमोरी कार्ड के जरिए डाटा सेव करने का काम होता है।
पिछली बार 170 के आसपास थी बाघों की संख्या
वर्ष 2018 में कराई गई गणना के आंकड़ों में दुधवा में 107 बाघ मिले थे, जबकि यहां 135 बाघ होने की संभावना जताई गई थी। वर्ष 2022 में हुई गणना में 153 बाघ पाए गए थे। इसके बाद भी यहां संख्या 170 होने का अनुमान लगाया गया था। इस बार भी गणना कार्य में बाघों की संख्या में इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसकी वजह है कि पर्यटन क्षेत्र में ही चार शावकों संग एक बाघिन नजर आ रही है, जबकि पार्क क्षेत्र में इस तरह के कितने शावक हैं और उनकी कितनी संख्या है। यह गणना के बाद ही स्थिति साफ होगी।
कहीं न कहीं बजट और अन्य कारणों के चलते बाघों की गणना का कार्य नहीं हो सका है। वैसे मार्च-अप्रैल में गणना होती है, लेकिन इस बार देरी हुई है। अक्तूबर-नवंबर में बाघों की गणना कराई जाएगी। पार्क प्रशासन हर साल बाघों की गणना करता है जबकि भारत सरकार की एनटीसीए चार सालों में गणना के बाद आंकड़ों को जारी करती है। - ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व