सामूहिक दुराचार के एक मामले में कानूनी प्रक्रियाओं से हटकर हल्की धाराओं में घटना को तब्दील करने पर एडीजे लालता प्रसाद ने कठोर रुख अपनाया है। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश मामले की तह में गए तो सारी लीपा-पोती और नियम विरुद्ध धाराओं की तब्दीली सामने आ गई।
एक युवती ने कोतवाली में 24 जून 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराते हुए चैनल स्वामी सहित चार के खिलाफ सामूहिक बलात्कार, ढाई वर्षीय बच्ची को आसन्न मृत्यु का संकट दिखाते हुए और जेवरात हड़प लेने और लूटपाट की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की तफ्तीश के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए आखिर में कोतवाली के एसएसआई शिवानंद प्रसाद यादव ने तफ्तीश को आगे बढ़ाते हुए घटना के बावत तत्कालीन एएसपी कुंवर ज्ञानंजय सिंह को रिपोर्ट सौंप दी, एसपीओ से भी कानूनी राय मांगी गई। बाद में इसी राय को आधार बनाकर 164 सीआरपीसी के अधीन दिए गए बयान में बताई गई सामूहिक बलात्कार जैसी गंभीर धाराओं को हटाकर दूसरी हल्की धाराएं लगा दी गईं। आरोपी रोहित वाजपेयी पर जमानत सुनवाई करते हुए अदालत ने सभी पहलुओं को बारीकी से रेखांकित किया। अदालत ने रोहित वाजपेयी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
प्रथम दृष्ट्या आरोपियों को दिलाया था लाभ
164 सीआरपीसी के तहत दिए गए पीड़िता के बयान के बावजूद गलत ढंग से धाराएं हटाने का दोषी बताते हुए एडीजे लालता प्रसाद ने तत्कालानी एएसपी और विवेचक शिवानंद प्रसाद यादव के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव, डीजीपी को आदेश की प्रति भेजी है।
गलत राय देकर फंसे एसपीओ भी
जिला स्तर पर अधिकारियों को कानूनी राय देने के अधिकारी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी के खिलाफ अदालत ने अपने फैसले में लिखा है कि ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी ने अभियुक्तों को प्रथम दृष्टया लाभ पहुंचाने की नियत से सुप्रीम कोर्ट की निर्णयक विधि के प्रतिकूल अनुमानित एवं निराधार विधिक राय दी है लिहाजा एसपीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियोजन निदेशक और उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को आदेश की प्रति भेजी है।
विधि की अवहेलना भी अपराध
पूर्व एडीजीसी शैलेंद्र सिंह गौड़ ने बताया कि विधि पवित्र और सर्वसुलभ है, कहीं भी मौन व अनुत्तरित नहीं है फिर भी विधि को विस्मृत करते हुए अथवा अवहेलना करते हुए कार्य किया जाता है तो यही कहा जाएगा कि अमुक व्यक्ति ने अपराध किया है।