आपसी संघर्ष में गई जान
जांच में पाया गया कि बाघ और तेंदुए की मौत आपसी संघर्ष से हुई है। ये अवैध शिकार के मामले नहीं हैं, क्योंकि मृत बाघों और तेंदुए के शरीर के सभी अंग मौके पर ही बरामद हुए हैं। वन मंत्री ने कहा कि प्राथमिक जांच से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया गया है। सवार ये है कि घटना के बाद गश्ती दल की नजर उस समय बाघ पर क्यों नहीं पड़ी ? यह विभागीय कम है। अभी जांच चल रही है। पूरी रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ही कार्रवाई तय करेंगे।
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किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज में मृत मिले बाघ की मौत भूख और प्यास से तड़पकर हुई थी। शरीर पर गहरे घाव थे। शव सड़ रहा था और कीड़े पड़ गए थे। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। आशंका है कि बाघ का किसी जानवर से संघर्ष हुआ होगा, जिससे वह घायल हो गया। शिकार करने में अक्षम रहा होगा।