सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर से पीड़ित को मिली मदद
मैगलगंज के गांव दरमा निवासी बालक के पैरों पर चढ़ गया था हैरो
कोल्हू मालिक ने गन्ना मूल्य के एवज में थमाए थे हजार के 16 नोट
मनोबृज अस्पताल में पैरों की हड्डी टूटने का इलाज करा रहे एक बालक को अस्पताल से इसलिए छुट्टी नहीं मिल सकी क्योंकि उसके पिता के पास अस्पताल का बिल भरने को हजार-हजार के नोट थे। यह समस्या जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोग मदद को आगे आए और उसे डिस्चार्ज कराया जा सका। इस चक्कर में उसे दो दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा।
फत्तेपुर चौकी क्षेत्र के गांव दरमा निवासी विनोद कुमार का नौ वर्षीय पुत्र अमित कुमार 16 नवंबर को खेत में जुताई के दौरान घायल हुआ था, उसे उसी दिन इलाज के लिए शहर के मनोबृज हास्पिटल में भर्ती कराया गया। जब तक फुटकर पैसे रहे, तब तक विनोद को दिक्कत नहीं आई। डॉक्टर ने डिस्चार्ज करने से एक दिन पहले 21960 रुपये का बिल थमाया तो विनोद कुमार ने मजबूरन औने-पौने दामों पर मितौली के कोल्हू पर गन्ना बेच दिया, लेकिन कोल्हू मालिक ने भुगतान में विनोद कुमार को हजार-हजार के 16 नोट दिए। शुक्रवार को विनोद कुमार ने भुगतान करना चाहा तो अस्पताल के डॉक्टर ने हजार के नोट लेने से मना करते हुए उसके बेटे को अस्पताल में ही रोक लिया। इससे परेशान विनोद ने परिवार, रिश्तेदारों से संपर्क कर मदद मांगी, लेकिन कहीं बात नहीं बनी। इस बीच शनिवार की शाम को किसी ने उसकी परेशानी को फेसबुक पर शेयर कर दिया, जिसके बाद उसकी मदद को कई लोग आगे आए। रविवार की सुबह ट्रांसपोर्टर एवं लखीमपुर-मैगलगंज बस आपरेटर्स यूनियन के अध्यक्ष मोहन वाजपेयी अस्पताल पहुंचे, जिसके बाद डॉक्टर ने भी दरियादिली दिखाते हुए बेड चार्ज माफ करते हुए भुगतान के लिए 14560 रुपये का बिल बनाया। इस पर ट्रांसपोर्टर ने डॉक्टर को 14500 रुपये भुगतान कर विनोद के पुत्र अमित को अस्पताल से डिस्चार्ज करा दिया, जिसके बाद पिता-पुत्र अपने गांव रवाना हो गए।
सरकार ने हजार के नोट पर पूरी तरह बैन लगा दिया है, जिससे भुगतान लेना संभव नहीं था। मरीज के तीमारदार से हजार के नोट बदलकर भुगतान करने के लिए कहा था।
-डॉ नीरज सिंह, मनोबृज हास्पिटल