लखीमपुर खीरी। शहर की ऐतिहासिक रामलीला में रविवार को नौका लीला का मंचन किया गया। सेठघाट पर हुई इस लीला को देखने के लिए आसपास के लोग पहुंचे। लीला में वन जा रहे श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को केवट अपनी नाव पर बैठाने से मना कर देते हैं। कहते हैं कि जब आप के चरण रज के स्पर्श से शिला एक सुंदर नारी बन गई, तो मेरी काठ की नाव की क्या बिसात।
नाव ही तो जीविका है, कैसे चलाऊंगा। वह श्रीराम के सामने शर्त रखता है कि वह उन्हें उसी दशा में नाव पर बैठाएगा, जब वे उसे चरण पखारने की अनुमति दें। भगवान राम केवट की भावना और चतुराई को समझ जाते हैं। राम मुस्कुराते हुए केवट को चरण पखारने की अनुमति दे देते हैं।
जो सारे संसार के लोगों को भव सागर पार उतारते हैं, उन्हें अपनी नाव से नदी को पार कराकर केवट धन्य हो जाता है। राम, लक्ष्मण और सीता को अपनी नाव से नदी पार कराने के बाद भी उसे संतोष नहीं मिलता। राम जब उसे उतारने के रूप में मुआवजा देने लगते हैं तो केवट बड़ी चतुराई से उसे लेने से मना कर देता है। कहता है कि वापस आते समय आप जो देंगे, उसे मैं शिरोधार्य करूंगा।
राम वन गमन की इस नौका लीला में राम केवट का संवाद को लोगों ने खूब सराहा। इस दौरान वहां सेठ गया प्रसाद ट्रस्ट के मुख्य सरवरहाकार विपुल सेठ, अभिषेक सेठ, किशन सेठ और ट्रस्ट के अन्य ट्रस्टी मौजूद रहे।