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इस बार ज्यादा चुनौतीपूर्ण है पंचायत चुनाव

Fri, 20 Nov 2015 05:25 PM IST
लखीमपुर खीरी।
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जिला और क्षेत्र पंचायत के चुनाव की अपेक्षा इस बार प्रधान और सदस्य ग्राम पंचायत का निर्वाचन प्रशासन के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। पहली चिंता सुरक्षा की है। क्योंकि सुरक्षा को लेकर अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती के संबंध में अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है। इससे चुनाव का पूरा जिम्मा पुलिस के ही कंधों पर है।
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जिस तरह नामांकन में प्रधान पद के लिए प्रत्याशियों की भीड़ उमड़ रही है। उससे यह स्पष्ट है कि इस बार प्रधानी चुनाव में उम्मीदवार भी ज्यादा होंगे। वहीं पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासन निर्धारित अवधि यानि 18 नवंबर तक बूथों की संवेदनशीलता भी तय नहीं कर पाया है।
इससे प्रथम चरण के मतदान तक बूथों पर पुलिस फोर्स की तैनाती को लेकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। जिले में 1167 ग्राम पंचायतों और 15077 सदस्यों पदों के लिए निर्वाचन होना है। चूंकि इस चुनाव में एक ही गांव से कई-कई प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
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इसलिए हर छोटे-बड़े व्यक्ति की दिलचस्पी होने से न सिर्फ चुनाव की रोचकता बढ़ गई है, बल्कि गांवों में लोगों के समूहों में बंटने से गुटीय संघर्ष से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। सीओ चुनाव मनोज यादव के अनुसार अति संवेदनशील प्लस गांवों में ज्यादा मात्रा में पुलिस फोर्स की तैनाती की जाएगी। अति संवेदनशील प्लस श्रेणी वाले गांवों की एसडीएम और सीओ की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर चिन्हित किया जा रहा है। इसके अलावा संवेदनशील गांवों में भी बैठकें कर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने की अपील की जा रही है।
देर तक मतदान से भी बढ़ेगी परेशानी
जिला और क्षेत्र पंचायत के चुनाव में कम दिलचस्पी होने के बावजूद जिले के कई केंद्रों पर शाम छह से सात बजे तक मतदान जारी रहा। जिससे वोटिंग 70 फीसदी तक रही थी। प्रधानी के चुनाव में वोटिंग देर शाम तक होने और मतदान प्रतिशत बढने की संभावना जताई जा रही है।
बूथों की संवेदनशीलता तय नहीं कर पाया प्रशासन
जिले के मतदान स्थलों की संवेदनशीलता की रिपोर्ट प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को 18 नवंबर तक तय करनी थी, लेकिन अभी तक संयुक्त रूप से होने वाली यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसलिए निर्वाचन कार्यालय या पुलिस लाइंस के चुनाव सेल में तहसीलों या सर्किल से संवेदनशील बूथों का आंकड़ा नहीं आ पाया है।
कच्ची शराब पर नहीं लग पा रही रोक
प्रधानी के चुनाव में कच्ची शराब का धंधा भी तेजी से चल रहा है। गांवों में सैंकड़ों लीटर शराब खपाई जा रही है। पुलिस ने कुछ ही जगहों पर शराब की बरामदगी की है, लेकिन कच्ची शराब को लेकर नियमित रूप से अभियान नहीं चल रहा है।
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