गौरीफंटा बार्डर पर लगा खराब ट्रांसफार्मर। संवाद
गौरीफंटा। भारत-नेपाल सीमा के गौरीफंटा बार्डर पर तैनात आधा दर्जन सरकारी विभागों में पिछले करीब सात सालों से बिजली नहीं है। इससे शाम होते ही विभागों के दफ्तर अंधेरे में डूब जाते हैं। यहां तैनात कर्मियों को बिजली न होने से गर्मी व अन्य समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। बाॅर्डर पर एक-दो विभागों में जनरेटर व सोलर पैनल के सहारे कुछ घंटे बिजली जलाने की सुविधा ही मात्र है।
सालों से फुंके ट्रांसफार्मर को न बदलवाने और विभाग द्वारा रुचि न लेने के अलावा वन विभाग की एनओसी न मिलने से बाॅर्डर पर बिजली सप्लाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। इस बारे में बिजली विभाग से बताया गया है कि ट्रांसफाॅर्मर को बदलवाने में मोटा खर्च आएगा और कोई भी विभाग उस खर्च को भरने के लिए तैयार नहीं है। इसके अलावा बाॅर्डर पर कई विभागों पर बिजली बिल भी बाकी है। इसके कारण ही बिजली काटी गई थी। सात वर्ष बीतने के बाद भी अभी तक बार्डर पर बिजली सप्लाई नहीं हो पाई है। इसका खामियाजा बार्डर पर तैनात एसएसबी, पुलिस, कस्टम, वन विभाग, इमीग्रेशन के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ ही वन विभाग की कैंटीन संचालकों को भी भुगतना पड़ रहा है।
कस्टम व एसएसबी कार्यालय में रात नौ व दस बजे तक जनरेटर से कार्यालयों में बिजली जलती दिखाई देती है जबकि पुलिस, वन विभाग व इमीग्रेशन में केवल सोलर लाइट लैंप से ही प्रकाश की व्यवस्था की जाती है। जनरेटर बंद होने के बाद बार्डर अंधेरे में डूब जाता है। इस बारे में बार्डर पर तैनात कार्यालयों के अधिकारियों का कहना है कि जब से वह आए हैं उससे पहले यहां बिजली नहीं आ रही है। बिजली विभाग की मानें तो वन विभाग से एनओसी नहीं मिल पा रही है जिसकी वजह से बार्डर तक बिजली नहीं जा पा रही है और बार्डर पर जो ट्रांसफार्मर लगा है वह भी काफी पुराना है। उसको बदलवाने के लिए भी विभाग से बात करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।