निघासन। निघासन क्षेत्र में शिक्षा विभाग की अनदेखी और लापरवाही के चलते हालात चिंताजनक हो चले हैं। गांवों में बगैर मान्यता के स्कूल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जिससे न सिर्फ सरकारी विद्यालयों में नामांकन प्रभावित हो रहा है, बल्कि कई विद्यालयों को विलय की कगार पर भी पहुंचा दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर शिक्षा विभाग ने निगरानी की होती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते।
तराई क्षेत्र के रकेहटी, चंदनपुरवा, सिंगहा, बल्लीपुर, बरसोला, बंगलहा, बरोठा समेत कई गांवों में बगैर मान्यता के निजी स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं। अधिकांश गांवों में एक से ज्यादा स्कूल खुले हैं, जो छात्रों की संख्या में बंटवारा कर सरकारी स्कूलों को अप्रासंगिक बना रहे हैं। हालत यह है कि बच्चों को अब दो से तीन किलोमीटर दूर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है।
शिक्षकों की लापरवाही बनी वजह
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी शिक्षकों की कार्यप्रणाली से मोहभंग हुआ है। कई स्कूलों में शिक्षण का स्तर गिरता जा रहा है, जिससे माता-पिता अपने बच्चों को गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में भेजने को मजबूर हैं।
बीईओ पर गिर सकती है गाज
नए सत्र से पहले ही शिक्षा विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी भी क्षेत्र में गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय चलता पाया गया तो उस क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) जिम्मेदार माने जाएंगे। आदेश में कहा गया है कि माह के अंत तक सभी बीईओ अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित अवैध स्कूलों की सूची बनाकर रिपोर्ट दें।
क्षेत्र में संचालित बगैर मान्यता वाले स्कूलों की जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। हमने सभी अध्यापकों से अपने-अपने क्षेत्र में संचालित ऐसे स्कूलों की सूची मांगी है। सूची मिलते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। - धर्मेश कुमार यादव, खंड शिक्षा अधिकारी