आलमीन जिस युवक से पहले शादी से इंकार कर चुकी थी बाद में उसी को दिल दे बैठी, घरवाले उसके साथ शादी करने से इंकार करते रहे लेकिन तमाम उतार चढ़ाव के बाद अंतत: उसकी शादी उसके पसंदीदा युवक से हो ही गई।
मोहल्ला काली मंदिर में रहने वाली आलमीन के वालिद बेचे का पांच वर्ष पहले एक दुर्घटना में इंतकाल हो गया था और दो वर्ष पूर्व उसकी मां चटपोरा भी चल बसीं। पानी की टंकी के सामने कपड़ों की प्रेस का काम करने वाला उसका भाई मतीन ही उसका सहारा रह गया था। लगभग छह माह पूर्व थोड़ी दूरी पर रहने वाले उसी बिरादरी के नूर मोहम्मद के घरवाले आलमीन के घर शादी का रिश्ता लेकर पहुंचे, तो आलमीन ने शादी करने से इंकार कर दिया। इसके बाद पता नहीं क्या हुआ कि आलमीन खुद ही नूर मोहम्मद को दिल दे बैठी। शादी का इंतजार करते थक चुकी आलमीन रविवार को नूर मोहम्मद के घर जा पहुंची और उससे निकाह करने को कहा तो युवक के हाथपांव फूल गए क्योंकि उसके घरवाले इसके लिए राजी नहीं थे।
उधर आलमीन के घर से चले जाने से नाराज भाई मतीन ने इसकी सूचना थाना पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलवाया, यहां बिरादरी को छोड़ पुलिस तथा मोहल्ले के लोगों ने दोनों पक्षों को शादी के लिए राजी कर लिया। आलमीन की गरीबी को देख लोगों ने चंदा किया और सोमवार की शाम आलमीन के घर पर ही उसका निकाह हाफिज तकीउद्दीन ने पढ़वाया। तब से आलमीन अपने मायके में नूर मोहम्मद के साथ रह रही है। निकाह में व्यापार मंडल अध्यक्ष सुनील चोपड़ा, नगर पंचायत सदस्य विजय कुमार बटल्लू, सुरेंद्र मिश्रा, मोहम्मद फहीम, शीबू, घनश्याम प्रसाद, राम सहाय, मोहम्मद अहमद आदि ने सहयोग किया।