नेतृत्व का सवाल, तो आस्था पर भी बन आई बात
समाजवादी पार्टी में परिवार के बीच चल रहे सियासी घमासान से कार्यकर्ता से लेकर पदाधिकारी हैरान हैं। होना भी लाजिमी है कि क्योंकि इस बार भतीजे ने एक झटके में ही अपने चचा समेत चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर पटखनी दी है। उधर पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थक अपने भाई और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया। इससे जिले में भी सियासी हलचल तेज हो गई है। बसपा जिलाध्यक्ष ने इसे परिवारवाद की चरम सीमा बताते हुए मुख्यमंत्री से जनता के हित में इस्तीफे की मांग की है। वहीं भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में सियासी करंट दौड़ गया है। जबकि समाजवादी पार्टी के खेमे में खामोशी है, क्योंकि बर्खास्तगी के सवाल पर नेता कोई बयान देने से बच रहे हैं।
नेतृत्व के सवाल पर अब शंकाएं भी सताने लगीं हैं, क्योंकि सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह के मंत्रिमंडल से निकाले जाने के बाद किसका पार्टी पर जोर चलेगा। हालांकि सपाई राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के साथ रहने की बात कहकर प्रदेश अध्यक्ष को किनारे कर रहे हैं। कोई भी पदाधिकारी मुख्यमंत्री के फैसले के विरोध करने की स्थिति में नहीं है और न ही खुलकर समर्थन में बोल पा रहा है। हालांकि सपा कार्यालय में एक-दूसरे से इशारों ही इशारों में सवाल होते रहे, कि इस सियासी ड्रामे का अंजाम क्या होगा। क्योंकि अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मंत्रिमंडल से बर्खास्त शिवपाल सिंह मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के बीच निर्णायक जंग छिड़ गई हैै।
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विवाद खनन के पैसे के बंटवारे का
खनन के पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद है। इसी को लेकर सपा में उठा पटक मची है। यह उनके परिवार का मामला है। जनता त्रस्त है और प्रदेश सरकार अपने वजूद को लेकर जूझ रही है।
-शरद बाजपेयी, जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी
परिवार टूटा तो पार्टी का बिखरना तय
समाजवादी पार्टी में चल रही अंतर कलह का एक मात्र कारण भ्रष्टाचार है। समाजवादी पार्टी एक परिवार की पार्टी है। पार्टी में जिस तरह कलह है उससे पार्टी का बिखरना तय है। आपसी लड़ाई में सरकार के कामकाज ठप हैं इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भोगना पड़ रहा है।
-राघवेंद्र बहादुर सिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
सरकार को देना चाहिए इस्तीफा
सरकार के अस्थिर हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री को तुरंत जनता के हित में इस्तीफा दे देना चाहिए। पार्टी और सरकार पूरी तरह परिवारवाद में डूब चुकी है। यह भ्रष्टाचार की कमाई पर एकाधिकार की जंग है, जिससे परिवार में सिर फुटव्वल की नौबत आ गई है। कानून व्यवस्था की हालत खराब हो चुकी है।
-अजय चौधरी, जिलाध्यक्ष, बसपा
हमारी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रति आस्था है। मंत्रिमंडल पर हुई कार्रवाई के बारे में कोई टिप्पणी नहीं दूंगा। नेतृत्व को लेकर कोई उहापोह की स्थिति नहीं है।
-अनुराग पटेल, जिलाध्यक्ष, सपा