मिट्टी के दियों से रोशन होगी इस बार की दिवाली
दुकानों पर भी कम दिख रहा चाइनीज झालरों का स्टाक
दिवाली पर चाइनीज माल के बहिष्कार का असर साफ दिखने लगा है। इलेक्ट्रिकल्स की दुकानों पर इस बार चाइनीज बिजली की झालरों की जगह देसी झालरों की भरमार है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार चाइनीज झालरों की मांग आधी भी नहीं रह गई है। देशी बिजली झालरें चाइनीज झालरों की अपेक्षा महंगी जरूर हैं लेकिन इस बार इनकी मांग बढ़ी है।
शहर के गुरुद्वारा रोड पर स्थित सिंह इलेक्ट्रिकल्स के प्रोपाइटर निर्मल सिंह उर्फ बबलू का कहना है कि चाइनीज बिजली झालरों के बहिष्कार की हवा कुछ इस तरह चल रही है कि लोग देसी झालरों का ही आर्डर दे रहे हैं। उन्होंने चाइनीज झालरें मंगाई जरूर हैं लेकिन हर साल की अपेक्षा काफी कम। उनका कहना है कि एक चाइनीज झालर 20 से 25 रुपये में पड़ती है वहीं देसी झालर कम से कम 80 रुपये में बैठती है। इससे इस बार झालरों का धंधा अभी मंदा चल रहा है।
दिवाली के समय बिजली की झालरें बेचने वाल मदन लाल, रामचंद्र, राजीव पुरी आदि का भी यही मानना है कि इस बार चाइनीज झालरों की डिमांड कम हैं। उनका यह भी कहना है कि चइनीज झालरें सस्ती जरूर हैं लेकिन टिकाऊ नहीं होतीं। देसी झालरें अधिक समय तक चलती हैं उनकी रोशनी भी चाइनीज की अपेक्षा अच्छी होती है। महंगी होने के बावजूद इस साल चाइनीज झालरों की अपेक्षा देसी झालरों की मांग ज्यादा है।
भुइफोरवानाथ निवासी मुकेश श्रीवास्तव कहते हैं कि इस बार चाइनीज झालर घर पर नहीं डालेंगे। उनकी जगह दिये और देसी झालरों का इस्तेमाल करेंगे। नई बस्ती निवासी आलोक अग्रवाल का कहना है कि भले ही दिवाली पर इस बार रोशनी कम हो लेकिन चाइनीज झालरों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। महाराजनगर के नरेश चंद्र भी चाइनीज झालरों के बहिष्कार के पक्षधर हैं।