बांकेगंज। मैलानी रेंज के बरौंछा नाले में दो माह से डेरा डाले बाघ अब तक एक दर्जन से अधिक पालतू मवेशियों को मार चुका है। यह बाघ मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बनता जा रहा है। रविवार सुबह भी इस बाघ ने घर में घुसकर एक पालतू बछड़े को मार दिया था।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन मैलानी रेंज की जटपुरा बीट के बरौंछा नाले का क्षेत्र अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। नाले में बहता शीतल पानी और दोनों और ऊंची-ऊंची झाड़ियां बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतवास उपलब्ध कराती हैं। यह बाघों के लिए पसंदीदा प्रजनन क्षेत्र भी है। सुरक्षा की दृष्टिकोण से बाघिन अक्सर जंगल से निकलकर इन्हीं झाड़ियों में अपने बच्चों को जन्म देती है। यहां पर प्रचुर मात्रा में हिरन, नीलगाय और जंगली सूअर मौजूद हैं। बाघों को इस भोजन के साथ-साथ पालतू और छुट्टा जानवरों का भी आहार मिलता है।
बांकेगंज से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थिति बरोंछा नाले की झाड़ियों में पिछले दो माह से एक बाघ ने अपना ठिकाना बना रखा है। यह अक्सर ढ़ाका, हरदुआ, कुकरा, खंजनपुर, महोलिया, जटपुरा गांवों की आबादी क्षेत्र के घरों में घुसकर खूटें में बंधे पालतू पशुओं को अपना निवाला बना रहा है।
रविवार सुबह यह बाघ हरदुआ गांव निवासी गोल्डी के घर में घुसकर एक पालतू बछड़े को खींच ले गया और मार डाला। इससे पहले भी यह बाघ करीब एक दर्जन पालतू मवेशियों का शिकार कर चुका है। आबादी क्षेत्र में बाघ की सक्रियता से ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों ने खेतों में जाना छोड़ दिया है। इससे उनका कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है। लोगों का वन विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग उसे जंगल में खदेड़ने का प्रयास नहीं कर रहा है।
बरौंछा नाला क्षेत्र बाघों का अनुकूल प्राकृतवास है। जहां उसे प्रर्याप्त मात्रा में भोजन और पानी उपलब्ध है, लेकिन आबादी क्षेत्र में घुसना और पालतू पशुओं को निवाला बनाना गंभीर बात है। इसे लेकर वन विभाग की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ी तो बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगाया जाएगा। - साजिद हसन, रेंजर, मौलानी