लखीमपुर खीरी। बिजुआ ब्लॉक के रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी लगातार गांव की जमीन काट रही है, लेकिन बचाव की जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है। बुधवार सुबह प्राचीन देवी माता मंदिर नदी में समा गया। इससे पहले वीरबाबा स्थान भी नदी की धारा में समा चुका है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सात से आठ मकान और करीब 180 एकड़ जमीन भी कटान की भेंट चढ़ चुकी है। गांव पर संकट बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग क्षेत्राधिकार को लेकर आमने-सामने हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता करन पाल गंगवार ने कहा कि रूरा सुल्तानपुर उनके क्षेत्र में नहीं आता और बाढ़ खंड से जानकारी लेने के लिए कहा। वहीं, बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने भी गांव को अपने क्षेत्र में नहीं बताया। उनका कहना है कि यह हिस्सा डूब क्षेत्र में आता है और सिंचाई विभाग के क्षेत्र में है।
ग्रामीणों का कहना है कि नुकसान के बाद मुआवजा तो मिलता रहा, लेकिन गांव को बचाने के लिए कभी प्रभावी बचाव कार्य नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि समय रहते कटानरोधी काम शुरू होता तो मंदिर, मकान और खेत बचाए जा सकते थे। बुधवार को मंदिर कटने के बाद राजस्व टीम गांव पहुंची थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट में क्या कहा गया, इसकी जानकारी नहीं हो सकी।
सरकारी नियम के अनुसार, रूरा सुल्तानपुर डूब क्षेत्र में आता है और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। इसके बावजूद विभाग गांव को अपने क्षेत्र में होने से इन्कार कर रहा है। आपदा विभाग के अनुसार, डूब क्षेत्र में कोई भी निर्माण व बचाव कार्य नहीं होता है। इसी वजह से वहां अभी तक कोई कार्य नहीं कराया गया। विभाग के अनुसार डूब क्षेत्र में बचाव कार्य कराने की अपेक्षा आबादी को दूसरी जगह सुरक्षित बसाने में कम खर्च आता है।
गोला एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि कटान की जद में आकर जिन ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके रहने के लिए प्रशासन ने स्थान उपलब्ध कराया है। हालांकि, प्रभावित ग्रामीण फिलहाल अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
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तीन गांव पहले ही शारदा की चपेट में
भीरा। रूरा सुल्तानपुर के आसपास के तीन गांव पिछले तीन साल में शारदा नदी की चपेट में आ चुके हैं। नयापुरवा और चकपुरवा पिछले साल नदी में समा गए थे, जबकि कुरियाना पुरवा भी पहले कटान की भेंट चढ़ चुका है। ग्रामीणों ने कहा कि वे हर वर्ष लिखित में बचाव कार्य की मांग करते हैं, लेकिन आज तक कुछ नहीं हो सका। अब रूरा सुल्तानपुर और उसके मजरा तनसुख पुरवा पर संकट है। तनसुख पुरवा में दो हजार से अधिक वोटर और करीब पांच हजार की आबादी बताई गई है। संवाद
वीरबाबा का मंदिर बहुत पुराना था। नदी में समाने से पहले यहां कोई बचाव कार्य नहीं कराया गया। समय रहते काम होता तो शायद मंदिर नहीं डूबता।
-बेचू लाल, निवासी कुरियाना
गांव में दो प्राचीन मंदिरों के साथ सात से आठ मकान कट चुके हैं। सैकड़ों एकड़ जमीन भी नदी में समा चुकी है और कटान लगातार जारी है।
-राजकमल, निवासी कुरियाना
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मामले की जानकारी कराई जाएगी। बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग से पूछा जाएगा। जिसकी भी जिम्मेदारी तय होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम
बेचू लाल
बेचू लाल