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सत्र शुरू होते ही कटने लगी अभिभावकों की जेब

Tue, 31 Mar 2015 12:15 AM IST
लखीमपुर खीरी
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कल एक अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है। अधिकांश स्कूलों ने रिपोर्ट कार्ड के साथ ही अभिभावकों को पुस्तकों की सूची भी थमा दी है। नए प्रवेश के लिए स्कूलों की तरफ अभिभावकों को आकर्षित करने के  लिए  प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया गया है। स्कूलों में फीस से लेकर किताबों तक के दाम बढ़ गए हैं।
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शिक्षा के व्यावसायीकरण के चलते शिक्षा दिनों दिन महंगी होती जा रही है। खास बात यह है कि इसमें न तो फीस निर्धारण के लिए कोई नियम है और न ही कोई प्रशासनिक हस्तक्षेप यहां फीस का निर्धारण करने का अधिकार स्कूल के प्रबंधक का ही होता है। इन स्कूलों में पढ़ा पाना भी सभी के बस की बात नहीं है, जो लोग इन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाते हैं वह भी कम परेशान नहीं हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें अपनी जेब कटवानी पड़ती है। इस वर्ष नया सत्र एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा तो अभी से स्कूलों ने अपने यहां 10 से 15 प्रतिशत तक फीस वृद्धि कर दी है। शहर में कई निजी क्षेत्र के विद्यालय ऐसे हैं, जहां कक्षा 6 से 8 तक 3500 रुपये तिमाही, 8 से 10 तक 4500 रुपये तिमाही और कक्षा 10 से 12 तक 5500 रुपये तिमाही फीस ली जाती है। इन सभी विद्यालयों ने अपनी फीस 10 से पंद्रह प्रतिशत तक बढ़ा दी है।
किताबों के भी दाम बढ़े
फीस के अलावा किताबों में भी अभिभावकों की जेब काटी जाती है। खास बात यह है कि प्रत्येक स्कूल की किताबों के लिए दुकान सेट रहती है उसी दुकान पर किताबें मिलेंगी। हालत यह है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कक्षा 6 का कोर्स लगभग 1500 रुपये का पड़ता है, जबकि इंटर का लगभग 4000 का पड़ता है। कई पुस्तक विक्रेताओं ने बताया कि पुस्तकों पर 10 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
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खर्चे बढ़ने के कारण बढ़ती है फीस
कई विद्यालयों के प्रबंधकों ने बताया कि अच्छी सुविधाएं दी जाती हैं इसके अलावा प्रत्येक वर्ष स्टाफ की सैलरी और खर्चे बढ़ाने पड़ते हैं। स्कूल के पास और कोई आमदनी का जरिया तो होता नहीं है इसलिए फीस तो बढ़ानी पडे़गी ही।
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