पलियाकलां। वाइल्ड लाइफ इको टूरिज्म के क्षेत्र में दुधवा टाइगर रिजर्व तेजी से नया पर्यटन हब बनकर उभर रहा है। फरवरी 2026 के ताजा आंकड़ों में पार्क के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल फरवरी की तुलना में इस बार करीब 10 लाख रुपये अधिक आय हुई है।
तराई क्षेत्र की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और दुर्लभ वन्यजीवों के कारण दुधवा पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनता जा रहा है। यहां साल के घने जंगल, विशाल घास के मैदान और दलदली वेटलैंड एक साथ देखने को मिलते हैं। यही विविधता इसे देश-विदेश के सैलानियों के लिए खास बनाती है। यहां अनगिनत वनस्पति और औषधियां हैं, जो विश्व में कुछ ही स्थानों पर पाई जाती हैं। दुधवा की असली ताकत यहां पाए जाने वाले तकरीबन सैकड़ों प्रजाति के पक्षी और दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन आदि हैं।
दुधवा में बाघों के साथ गैंडा पुनर्वास परियोजना के तहत गैंडों की अच्छी संख्या है। बारहसिंगा की अटखेलियां और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। जैव विविधता की यही समृद्धि यहां के इको टूरिज्म की मजबूत आधारशिला बन रही है।
आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 में दुधवा का कुल राजस्व 18,72,890 रुपये था, जो फरवरी 2026 में बढ़कर 28,76,612 रुपये पहुंच गया। पिछले वर्ष की तुलना में नवंबर, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में भी करीब एक करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ था। संवाद
फरवरी में 223 विदेशी सैलानी पहुंचे
दुधवा में सैलानियों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फरवरी 2025 में जहां 133 विदेशी पर्यटक आए थे, वहीं फरवरी 2026 में यह संख्या बढ़कर 223 हो गई। भारतीय सैलानियों की संख्या भी 5,358 से बढ़कर 5,785 हो गई है। उपनिदेशक डॉ. जगदीश आर ने बताया कि पहले गैंडा देखने के लिए पर्यटक असम जाते थे, लेकिन अब दुधवा उनकी पसंद बन रहा है। बाघों की बेहतर साइटिंग और सुविधाओं में सुधार से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
-ये रहे प्रमुख कारण
-बाघ और गैंडे की बेहतर साइटिंग
-होम स्टे और ईको हट्स की सुविधाओं में सुधार
-ऑनलाइन बुकिंग और सोशल मीडिया से बढ़ी पहुंच
-विदेशी पर्यटकों की बढ़ती दिलचस्पी