सरकारी सिस्टम में झोल ही झोल हैं, जिसका निशाना बनते हैं सीधे साधे लोग। शहर से सटे रंगीलानगर में कुछ लोगों ने मिलीभगत से एक रिटायर्ड शिक्षिका की जमीन अपने नाम करा ली। ग्राम प्रधान से सांठगांठ कर मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया। जब जमीन पर कब्जा होने लगा तब रिटायर्ड शिक्षिका को इसकी जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए। पुलिस ने इस मामले में ग्राम प्रधान समेत आठ लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की है।
मोहल्ला काशीनगर निवासी विंदेश्वरी देवी बेसिक शिक्षा परिषद की सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि पति शिव भगवान दीक्षित और परिवार वालों के साथ वह रहती हैं। वर्ष 1975 में उन्होंने शहर से सटे गांव रंगीलानगर में 0.996 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। गांव के ही चार सगे भाई सुरेश कुमार, रामकुमार, बाबूराम, कन्ने और इनके पिता बहोरीलाल ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और एक अज्ञात महिला को विंदेश्वरी बनाकर खड़ा कर उनकी जमीन की फर्जी वसीयत करा ली। वसीयत में उनका पता निवासी रंगीला नगर लिखा और दर्शाया कि विंदेश्वरी के कोई पुत्र नहीं हैं, जबकि उसके दो विवाहित पुत्र और एक विवाहित पुत्री है। शिक्षिका विंदेश्वरी ने बताया कि 28 सितंबर 2005 को आरोपियों ने उप-निबंधक कार्यालय लखीमपुर में वसीयतनामा पेश किया। यह वसीयतनामा सुरेश कुमार, रामकुमार बाबूराम और कन्ने के पक्ष में लिखा था। रामकुमार ने बतौर गवाह हस्ताक्षर बनाए। सुनियोजित तरीके से वर्ष 2012 में आरोपियों ने मृत दर्शाकर वसीयत तहसीलदार के अदालत में दाखिल खारिज करने के लिए वाद दायर कर दिया। ग्राम प्रधान शमीम बेग ने जानबूझकर विंदेश्वरी के मृत होने का सर्टिफिकेट जारी कर दिया, जिसके आधार पर आरोपी दाखिल खारिज करने में कामयाब हो गए। इस धोखाधड़ी की जानकारी उन्हें तब हुई जब 25 जून 19 को आरोपियों ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए कब्जा करने का असफल प्रयास किया। संदेह होने पर जब उन्होंने तहसील पहुंचकर अभिलेखों की जांच कराई तो उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई। उन्होंने ग्राम प्रधान समेत सभी आरोपियों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
तहरीर के आधार पर रंगीलानगर के ग्राम प्रधान शमीम सहित सभी आठ आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
फतेह सिंह प्रभारी निरीक्षक कोतवाली सदर