लखीमपुर खीरी। किशोरी को बहला-फुसलाकर साथ ले जाने और दुष्कर्म के 14 साल पुराने मामले में एडीजे अभिषेक श्रीवास्तव ने दुष्कर्मी को 10 साल के कठोर कारावास और जुर्माना की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मितौली थाना क्षेत्र के ग्राम खमरिया में रहने वाले पुष्पेंद्र उर्फ पुष्कर की ससुराल हैदराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में थी। गांव का दामाद होने के चलते वहां पहुंचने पर उसका आदर सत्कार भी होता था। इसी बात का अनुचित लाभ उठाते हुए 20 अगस्त 2011 की शाम को वह अपनी ससुराल पहुंचा और बहला-फुसलाकर एक किशोरी को अपने साथ लेकर चला गया।
कई दिन तलाश के बाद भी किशोरी का पता नहीं चला तो उसके पिता ने थाना हैदराबाद में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें गांव की दो महिलाओं को भी नामजद किया गया, लेकिन पुलिस जांच में दोनों की नामजदगी गलत पाई गई। लिहाजा, हैदराबाद पुलिस ने आरोपी पुष्पेंद्र उर्फ पुष्कर के खिलाफ किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया।
अदालती सुनवाई के दौरान पीड़िता किशोरी और उसके पिता के साथ ही डॉ. वीके वर्मा, डॉ. मीनाक्षी चौधरी, इंस्पेक्टर रमेशचंद्र सहित सात लोगों ने गवाही दर्ज कराई। बुधवार को एडीजे अभिषेक श्रीवास्तव ने दोषी पाए गए पुष्कर उर्फ पुष्पेंद्र को 10 साल के कठोर कारावास और 14 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है। साथ ही अपने फैसले में पीड़िता किशोरी को वसूल किए गए जुर्माना की रकम मुआवजे के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है।
दुष्कर्मी बन जाता है जानवर : कोर्ट
एडीजे अभिषेक श्रीवास्तव की अदालत ने अपने फैसले में दुष्कर्म को समाज के लिए जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि यह अपराध आरोपी को जानवर बना देता है। उसे कठोर दंड मिलना चाहिए ताकि भविष्य में अपराधी ऐसे अपराध से भयभीत रहे।