लखीमपुर खीरी। शहर से देहात तक बिजली व्यवस्था को सुधारने के लिए रीवैंप योजना का काम समय सीमा गुजरने के आठ माह बाद भी जिले में शतप्रतिशत नहीं हो पाया है। 95 फीसदी कार्य होने के बाद भी उपभोक्ताओं को फॉल्ट कटौती का झटका दे रहे हैं। खासकर जब गर्मी ज्यादा पड़ती है, तब ज्यादा परेशानी आती है। इधर, अफसर दावा कर रहे हैं कि अब फॉल्ट में कमी आई है।
जिले में रीवैंप योजना का काम अप्रैल 2023 में शुरू हो गया था, जो जनवरी 2025 तक पूरा होना था। यह कब पूरा होगा, अफसरों को कुछ पता नहीं है। योजना के तहत लखीमपुर और गोला सर्किल में 140 करोड़ बजट में रीवैंप का काम कराया जा रहा है, जिसमें 88.50 करोड़ रुपये लखीमपुर सर्किल का है। लखीमपुर सर्किल में निघासन, मितौली और लखीमपुर डिवीजन हैं और गोला सर्किल में पलिया, गोला और मोहम्मदी डिवीजन है।
लखीमपुर सर्किल के कार्यों पर नजर डालें तो 21 हजार बिजली खंभों को लगाया जाना है, जिसमें 20,810 खंभे लगाए जा चुके हैं। वहीं, 900 किलोमीटर सर्किल में तार बिछाने का लक्ष्य है, जिसमें अब तक 811 किलो मीटर बिछाए जा चुके हैं। लखीमपुर में चार, निघासन में एक और मितौली में सात फीडर लोड बढ़ाने का काम पूरा हो गया।
जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बिजली चोरी सामने आई, वहां पर आर्म्ड केबिल डाली जा रही है। इसका लक्ष्य दो किलो मीटर सर्किल है, जिसका काम पूरा हो चुका है। 11 हजार लाइन की करीब 900 किलो मीटर सर्किल में काम होना है, जिसमें अब तक 820 किलो मीटर सर्किल का काम पूरा हो चुका है। जर्जर लाइन बदलने के लिए 12 किलोमीटर सर्किल का लक्ष्य है, जो शत-प्रतिशत होने का दावा है। लखीमपुर सर्किल के 74 फीडरों का काम होना है।
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गर्मी में रोकना पड़ा था काम
कंपनी के सीनियर इंजीनियर रोहित कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी की वजह से बीच में काम रोकना पड़ा, ताकि उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना न करना पड़े। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में फसलें खड़ी थीं, जिसकी वजह से काम प्रभावित रहा। कुछ काम में बदलाव होने की वजह से भी लेट हुआ है। अब जो शेष पांच प्रतिशत काम अधूरा है, वो जल्द पूरा करा लिया जाएगा।
रीवैंप का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिससे अब नाम मात्र के ही फॉल्ट हो रहे हैं। पहले की अपेक्षा बिजली व्यवस्था में काफी सुधार है।
-धमेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता