परीक्षा से पहले ही हाईस्कूल, इंटर के परीक्षार्थी एक नई मुसीबत से जूझने लगे हैं। परीक्षार्थियों को उनकी पढ़ाई के समय बिजली नहीं मिल पा रही है। इसके कारण परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि 24 घंटे में 15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है, इसमें भी पढ़ाई के समय बिजली गुल रहती है। हाईस्कूल और इंटर के लिए यूपी बोर्ड 19 फरवरी से परीक्षा की तिथि घोषित कर चुका है और परीक्षाओं की स्कीम भी आ गई है। जिले में इस साल दोनों कक्षाओं के करीब 50 हजार परीक्षार्थी बोर्ड की परीक्षा देंगे।
पेयजल व्यवस्था चरमराई
मौजूदा रोस्टर से सुबह जब घरेलू कार्यों के लिए लोगों को सर्वाधिक बिजली की जरूरत होती है, उस समय उन्हें बिजली नहीं मिल पाती है। नहाने-धोने से लेकर अन्य दैनिक कार्यों के लिए पेयजल के लिए बिजली उपलब्ध नहीं रहती है। रात में बिजली कटौती सुरक्षा के लिए चुनौती साबित हो रही है। घरों में चोरियां, राहजनी और लूट की घटनाएं बढ़ रही हैं।
गांवों को 10 और शहर में 15 घंटे की सप्लाई
शहर में रात 11 बजे से लेकर चार बजे और सुबह आठ बजे से लेकर 11 बजे तक बिजली कटौती हो रही है। दिन में कई घंटे इमरजेंसी कटौती लागू हो जाती है। वहीं गांवों में रात 11 बजे से लेकर चार बजे तक और सुबह छह बजे से 11 बजे तक दो शिफ्टों में महज 10 घंटे बिजली मिल पा रही है।
यह कहते हैं विद्यार्थी
खुशवक्तराय कॉलेज की इंटर की छात्रा अंजलि लालवानी का कहना है कि मौजूदा समय में बिजली की सप्लाई छात्रों की परीक्षा को ध्यान में रखकर करनी चाहिए।
हाईस्कूल की छात्रा अना एहतिशाम कहती हैं कि इस समय बिजली की कटौती के कारण परीक्षा की तैयारी करने में परेशानी आ रही है। शासन-प्रशासन को इस संबंध में कदम उठाना चाहिए।
जीआईसी के इंटर के छात्र सूरज मिश्रा का कहना है कि सुबह और रात के समय हो रही बिजली कटौती का शेड्यूल बदला जाए तो छात्रों को पढ़ाई में आसानी हो जाएगी।
स्वामी प्रकाश इंटर कॉलेज में हाईस्कूल के छात्र अमन ने कहा कि बिजली जीवन का जरूरी हिस्सा बन गई है। नियमित रूप से बिजली न मिलने के कारण पढ़ाई के साथ-साथ रहन-सहन पर भी असर पढ़ता है।
एसडीओ टाउन धर्मेंद्र आंनद ने बताया कि सिस्टम कंट्रोल से बिजली कटौती के लिए जो समय निर्धारित है वह लोकल स्तर पर नहीं बदला जा सकता है। समय में फेरबदल के लिए प्रशासन की ओर से चिट्ठी भेजी जाती है। हम प्रयास कर रहे हैं कि परीक्षाओं के समय कम से कम बिजली कटौती की जाए।