फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जन समस्या समाधान को लेकर अफसर गंभीर नहीं

Tue, 05 Sep 2017 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  लखीमपुर खीरी।
विज्ञापन
कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
 पुलिस और पब्लिक के बीच बढ़ी दूरी कम करने के लिए महकमा भले ही प्रयासरत हो, लेकिन अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। वह कार्ययोजनाओं को पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसकी हकीकत सोमवार की रात तब सामने आ गई। जब जन समस्या समाधान अभियान के तहत एसपी से लेकर थानेदार तक गांवों में पहुंचे। अधिकांश जगहों पर थानेदारों ने केवल खानापूरी की। पुलिस ने बैठकर कुछ लोगों के साथ फोटो खिंचवाई और एसपी को व्हाट्सऐप पर भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। पुलिस का दावा है कि अभियान में एसपी समेत 276 पुलिसकर्मी शामिल रहे और 2760 शिकायतों का निस्तारण किया गया।  
विज्ञापन

 
उदासीन दिखी हैदराबाद पुलिस  
थाना हैदराबाद पुलिस भी अभियान को लेकर उदासीन दिखी। गांव में एसओ ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर चौपाल तो लगाई, लेकिन जनता को कर्तव्यों का पाठ पढ़ाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। न ही समस्या सुनीं और न ही कोई दिलचस्पी दिखाई। आम अफसरों की तरह एसओ और पुलिसकर्मी कुर्सियों पर जमे रहे।  
 
 
थाने के पास ही बैठकर निभा दी औपचारिकता 
सोमवार को सिंगाही एसओ रामकुमार यादव ने दूर के गांवों में जाने के बजाय सिंगाही कस्बे में ही थाने से कुछ दूरी पर ही चौपाल लगा दी। खास बात यह है कि इस चौपाल में वहीं लोग दिखाई दिए, जिनका कमोवेश रोज ही थाने पर आना जाना रहता है। इसमें न कोई पुलिसकर्मी नजर आया और न ही आम जनता के बीच का आदमी।  
विज्ञापन

 
गांव में भ्रमण कर सुनीं जनता की समस्याएं 
 
थाना नीमगांव पुलिस की काफी हद तक डीजीपी के मंशा अनुरूप अभियान में भागीदारी दिखी। एसओ संजय कुमार सिंह पुलिस कर्मियों के साथ गांव द्वारिकानगर और नगरा डांटा में भ्रमण किया और समस्याएं सुनी। साथ ही यथासंभव समस्याओं का निस्तारण भी कराया।  
 
अभियान का यह है मकसद 
जनता और पुलिस के बीच नजदीकी, तालमेल बढ़ाने के लिए डीजीपी ने पूरे प्रदेश में जन समस्या समाधान अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। अभियान की मंशा यह थी कि एसओ, चौकी इंचार्ज, सीओ, एएसपी और एसपी तक गांवों में जाकर लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और यथासंभव उनका समाधान करेंगे। साथ ही गांव के कम से कम 10 जागरूक लोगों के मोबाइल नंबर लेंगे। जिसे वह थाने पर रखने के साथ एसपी को भी उपलब्ध कराएंगे। ताकि जिला स्तर से मानीटरिंग की जा सके।  
 
डीजीपी साहब की बड़ी सराहनीय पहल है। इससे जनता और पुलिस के बीच संवाद बेहतर होगा। अपराधों पर भी अंकुश लगेगा। अगर इसके क्रियान्वयन में कहीं पर भी लापरवाही मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। 
विज्ञापन

डॉ. एस चन्नप्पा, एसपी खीरी  
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें