कथा सुनाते हुए पंडित राजेश दीक्षित। स्रोत आयोजक
लखीमपुर खीरी। शारदानगर मार्ग स्थित रौली रामापुर गांव में श्री वेदमाता गायत्री प्रज्ञा पीठ पर पंच कुंडलीय गायत्री महायज्ञ का रविवार को अंतिम दिन रहा। कथा व्यास पंडित राजेश दीक्षित ने श्रीमद् प्रज्ञा पुराण सुनाई। बोले कि इस सृष्टि में तीन की संख्या बहुत महत्वपूर्ण है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीन देवता तो गंगा, यमुना, सरस्वती तीन नदियां मुख्य हैं।
परमब्रह्म की तीन विशेषताएं सत्, चित्, आनंद प्रसिद्ध हैं। इनकी प्राप्ति के लिए ऋषियों ने तीन सूत्र बताए हैं, ज्ञान, कर्म और भक्ति। त्रेता में तीन असुर थे रावण, कुंभकरण, मेघनाद तो द्वापर में भी तीन असुर थे कंस, जरासंध और शिशुपाल।
कलयुग के तीन राक्षस हैं अज्ञान, अभाव, अनीति। तीनों ने समाज को घेर रखा है। चारों तरफ इनका साम्राज्य है। कथा संपन्न होने के बाद परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधान रामलखन, शोभा शर्मा, रामगोपाल शर्मा, ब्रह्मा दीन, वंदना बाजपेई, पंडित श्रीराम शर्मा, भगवती देवी शर्मा आदि मौजूद रहे। संवाद