लखीमपुर खीरी। सात साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने के मामले में साढ़े आठ साल बाद एडीजे अनिल कुमार राना ने दोषी को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। उस पर एक लाख पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन की ओर से पक्ष रखते हुए एडीजीसी संजय सिंह ने बताया कि 26 अप्रैल 2015 को खीरी के एक मोहल्ले की सात वर्षीय बच्ची अपने नौ वर्षीय भाई के साथ खेल रही थी, तभी महबूब दोनों बच्चों को बहाने से अपने घर बुला ले गया था। बाद में पांच रुपये देकर भाई को धनिया लाने भेज दिया और फिर बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। शव शौचालय के टैंक में छिपा दिया। अगले दिन 27 अप्रैल 2015 को पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद बच्ची का शव बरामद किया था।
पोस्टमार्टम में भी दुष्कर्म और हत्या की पुष्टि हुई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान विवेचक महेंद्र गंगवार समेत आठ लोगों की गवाही दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष की कोई दलील काम न आई। शुक्रवार को अदालत ने अपने फैसले में महबूब को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उस पर अलग-अलग धाराओं में एक लाख पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पुलिस ने महबूब के साथ ही असलम उर्फ घुरू के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने ठोस सबूत न मिलने के कारण उसे संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
ऐसे अपराधी का जेल से बाहर आना घातक
अदालत ने अपने फैसले में सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और उसकी निर्ममता से हत्या करने को जघन्य अपराध बताया है। कहा है कि ऐसे अपराधी का जेल से बाहर आना खतरनाक होगा। लिहाजा उसे अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है
जुर्माने की आधी रकम पीड़ित परिवार को मिलेगी
अदालत ने अपने फैसले में पीड़ित परिवार के साथ हमदर्दी व्यक्त करते हुए यह व्यवस्था दी है कि जुर्माने की रकम एक लाख पांच हजार रुपये में से आधी रकम पिता को बतौर मुआवजा अदा की जाएगी।
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