लखीमपुर खीरी। जिले की राजापुर मंडी में उल्टी बोली की प्रथा पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई है। इससे किसानों का शोषण रुक नहीं रहा है। सूत्रों का कहना है कि आढ़तिये राजनीतिक रसूख रखते हैं, लिहाजा अधिकारी उन पर कार्रवाई से कतरा रहे हैं।
उल्टी बोली का सिलसिला पूरे साल चलता है। यह बोली केवल धान, गेहूं, लाही आदि की खरीदारी के लिए लगाई जाती है। किसान कुलविंदर सिंह ने बताया कि मैं धान लेकर आढ़त पर आया, लेकिन यहां पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम 19 सौ रुपये क्विंटल का ही भाव मिला। इससे उन्हें करीब चार सौ से अधिक रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाना पड़ा। पूछने पर बताया कि सरकारी केंद्रों पर तमाम दिक्कतें हो रही हैं। इसलिए आढ़त पर आए थे। सोचा था कि एमएसपी के बराबर मूल्य तो मिलेगा ही, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लहरपुर से आए किसान सोनेलाल ने भी आढ़तियों पर मनमाना तरीका अपनाने का आरोप लगाया है।
नाम न छापने की शर्त पर मंडी के ही कर्मचारी ने बताया कि धान खरीद में सबसे ज्यादा कमाई आढ़तियों की होती है। हिस्सा ऊपर तक जाता है। कई बार राजनीतिक हस्तक्षेप होने के चलते भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते। महज अधीनस्थों से पूछकर कागजी कार्रवाई पूरी कर लेते हैं।
-जिम्मेदारों का ये है कहना
मंडी की सभापति अर्चना ओझा से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने मंडी सचिव आशीष सिंह से वार्ता की। उनका कहना था कि मंडी सचिव को इस बात की कोई जानकारी नहीं है। खुद जाने की बात कहकर मामले को टला दिया। कई दिन बीतने के बाद भी वह मंडी नहीं पहुंचीं।