नैफेड के तीन क्रय केंद्रों पर खरीद अभी शून्य
बैंकों में कैश की किल्लत से क्रय केंद्रों पर घटी आवक
गेहूं खरीद शुरू हुए करीब एक माह बीतनेे को है, लेकिन नैफेड ने अपने तीन क्रय केंद्रों पर तोल शुरू नहीं की है। बल्कि नैफेड के जिला प्रबंधक आशुतोष शुक्ला ने इस्तीफा देकर गेहूं खरीद से पल्ला झाड़ लिया है। डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने मामले की सूचना डीएम को दी है। वहीं बैंकों में कुछ दिनों से चल रही कैश की किल्लत का असर सरकारी गेहूं खरीद पर देखने को मिल रहा है। केंद्रों पर गेहूं की आवक कम हो गई है, क्योंकि यहां आरटीजीएस के जरिए किसानों के खाते में भुगतान किया जाता है। लिहाजा किसान नगद भुगतान हासिल करने के लिए बिचौलियों के हाथों गेहूं बेचना ज्यादा मुफीद मान रहे हैं।
बता दें कि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य 2,94,000 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के लिए 146 क्रय केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें नैफेड के तीन क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं, जिसे चार हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य मिला है। नैफेड के जिला प्रबंधक आशुतोष शुक्ला ने खरीद शुरू नहीं कराई, जब दबाव पड़ा तो इस्तीफा देकर चलते बने। डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने मामले की रिपोर्ट डीएम को सौंपी है। इस्तीफा देने के कारणों का पता नहीं चल सका है। वहीं अन्य एजेंसियों ने मिलकर 27 अप्रैल तक 43950 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है, जो लक्ष्य के सापेक्ष करीब 15 फीसद है। खाद्य विभाग ने सबसे ज्यादा 51 फीसद, पीसीएफ ने 22 फीसद, एसएफसी ने 19 फीसद खरीद की है। जबकि कल्याण निगम, यूपी एग्रो, एनसीसीएफ, पीसीयू और एफसीआई की खरीद के आंकड़े दहाई तक नहीं पहुंच सके हैं।
किसानों को 71.42 करोड़ हुआ भुगतान
शुरुआत के एक माह में 6347 किसानों का गेहूं एजेंसियों ने खरीदा हैै, जिन्हें 71.42 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। जबकि 9.87 लाख रुपये किसानों का एक एजेंसी पर बकाया है।
नैफेड ने खरीद शुरू नहीं की है, जिसकी रिपोर्ट डीएम को भेजी है। बैंकों में कैश की किल्लत होने से गेहूं की आवक कम हुई है, जिससे खरीद की गति धीमी हुई है। क्योंकि किसान नगद पैसे के लिए आढ़तियों के पास गेहूं बेच रहे हैं।
कौशल देव, डिप्टी आरएमओ