पंचायत चुनाव की तैयारियों के दौर में मतदाता सूचियों ने प्रशासन के काम पर ब्रेक लगा दिया है। तय समय में न तो आपत्तियां निस्तारित हो पा रहीं है और न ही शिकायतों का दौरा थम रहा है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की आपत्तियों के निस्तारण के लिए 25 अगस्त निर्धारित कर दी थी, लेकिन दो दिन बाद भी अभी तहसीलों से निस्तारित होकर सूचियां पंचायत चुनाव कार्यालय नहीं आ सकी हैं।
बुधवार को देर शाम तक पंचायत चुनाव कार्यालय में तहसीलों से आने वाली अंतिम सूची ही नहीं उपलब्ध हो सकी। पंचायत चुनाव से पहले प्रशासन को मतदाता सूची की खामियों ने माथे पर पसीना ला दिया है। जिले भर में मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर आरोपों का दौर नही थम रहा है। कहीं मृतकों के नाम शामिल हैं सूची में तो कहीं पर गांव में रह रहे लोगों को ही या तो गांव से पलायन दिखाया गया है या फिर उन्हें मृ़तक दिखाकर सूची से गायब कर दिया गया है। इन सूचियों के प्रकाशन के बाद से ही जगह-जगह आरोप लगने शुरू हो गए, चुनाव आयोग की गाइड लाइन के मुताबिक आपत्तियों के निस्तारण के लिए 25 अगस्त की निर्धारित की गई थी, लेकिन सूचियों में खामियों को देखते हुए दो दिन बाद भी अब तक आपत्तियां ही निस्तारित नहीं हो सकीं। बुधवार को पंचायत चुनाव कार्यालय में तहसीलों से आने वालीं सूचियों का इंतजार ही होता रहा। वहीं इस मामले में एडीएम एसपी सिंह ने खुद को मीटिंग में मशगूल होने से कुछ भी बताने में असमर्थता जताई है।
यूं ही लगते रहे आरोप तो चुनाव में हो सकते हैं बवाल
ग्राम पंचायतों में जिस तेजी से मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं, उससे गांवों में रंजिश भी बढ़ रही हैं। दावेदार एक दूसरे पर अपने पक्ष के लोगों के नाम कटाने के आरोप लगा रहे हैं, अगर समय रहते इन सूचियों के निस्तारण न हुए तो पंचायत चुनाव में यही आरोप रंजिश में बदल जाएंगे।