रक्षाबंधन पर मिठाई की भारी डिमांड को पूरा करने के लिए दिन-रात मिठाई बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस मौके पर दुकानदार मुनाफा कमाने की होड़ में जुट गए हैं, जिससे मिलावट की पूरी आशंका बनी हुई है। वहीं मिठाई बनाने के स्थान (कारखाने) में साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई जगह तो खुले में मिठाई बनाई जा रही है, जिससे लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। रक्षाबंधन को कुछ दिन शेष हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अब तक इस ओर सुधि नहीं ली है।
40 लाख की आबादी वाले इस जिले में त्योहार पर दूध से बनी मिठाई और सह उत्पादों की भारी डिमांड रहती है। रक्षाबंधन पर दूध की दोहरी खपत होती है, क्योंकि सेवइयां बनाने के लिए लोग एक दिन पहले से ही दूध खरीदना शुरू कर देते हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले में रक्षाबंधन पर करीब पांच हजार क्विंटल मिठाई की खपत होने की उम्मीद है। शहर से लेकर गांवों तक में दुकानदार मिठाई बनाकर स्टाक कर रहे हैं, ताकि ज्यादा सेल की जा सके। शहर की प्रमुख दुकानों पर मिठाई बनाने के दौरान साफ-सफाई का अभाव है, जिससे लोगों की सेहत खतरे में है। अमर उजाला टीम ने कुछ दुकानों का जायजा लिया तो हकीकत सामने आ गई। ऐरा रोड स्थित एक मिठाई दुकान पर बाहर ही सड़क किनारे खुले में मिठाई बनाई जा रही थी, जिससे धूल आदि गंदगी कढ़ाई तक पहुंच रही थी। इसके अलावा मिठाई बना रहे कारीगरों की चप्पले भी उसी तख्त पर रखी मिलीं। वहीं विभागीय अधिकारी इससे बेखबर हैं।
अभिहित अधिकारी डॉ अमर सिंह वर्मा ने बताया कि विभाग की ओर से अभी निर्देश नहीं मिले हैं। निर्देश मिलते ही फोर्स के साथ दुकानों पर निरीक्षण कर सैंपलिंग की जाएगी।