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नवरात्र के अंतिम दिन  कन्या भोज की धूम

Fri, 15 Apr 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
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नवरात्र - फोटो : अमर उजाला
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नवरात्र के अंतिम दिन 
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कन्या भोज की धूम
श्रद्धालुओं ने की मां सिद्धदात्री की पूजा
बहुत से लोगों ने मंदिरों में जाकर किया सामूहिक हवन
लखीमपुर खीरी। नवरात्र के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने मां सिद्धदात्री की अराधना की। शुक्रवार को हवन पूजन के साथ कन्या भोज की धूम रही। संकटादेवी मंदिर, शीतला देवी मंदिर और वंकटादेवी मंदिर में सुबह से कन्याभोज का सिलसिला शुरू हो गया था जो देर शाम तक जारी रहा। महिलाओं ने कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया। शुक्रवार को भी हवन पूजन का क्रम जारी रहा। बहुत से लोगों ने घरों पर तो तमाम लोगों ने मंदिर में जाकर हवन और कन्या जिमायीं।
नवरात्र के अंतिम दिन मंदिरों में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रही। उधर गायत्री शक्तिपीठ में नवरात्र के अंतिम दिन सामूहिक यज्ञ का आयोजन किया गया। सुबह से दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। लोगों ने कतार में खड़े होकर मां के दर्शन किए। महिलाओं ने कन्याओं को दही, जलेबी और खीर पूड़ी आदि खिलाकर दक्षिणा भी दी। घरों में कन्या भोज के लिए कन्याएं ढूंढने में दिक्कत हुई तो मंदिरों में कन्याओं की भरमार रही। 
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नवरात्र के अंतिम दिन कन्या भोज के साथ भंडारों की भी धूम रही। मंदिरों के अलावा सार्वजनिक स्थलों पर भी भंडारे आयोजित किए गए। दुर्गाष्टमी की रात शहर में कई जगह देवी जागरण हुए। देवी जागरण के बाद हवन और फिर भंडारे हुए। भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। नवरात्र का अंतिम दिन और रामनवमी होने के कारण जिले का वातावरण भक्ति से सराबोर रहा। 
कन्याभोज के साथ नवरात्र का समापन
गोला गोकर्णनाथ। कन्याभोज के साथ नवरात्र का समापन हो गया। रामनवमी पर नगर और क्षेत्र के देवी मंदिरों और घरों में हवन पूजन के बाद कन्याभोज कराया गया। इसके साथ देवी भक्तों ने नवरात्र व्रत का पारण किया। इसके चलते देवी मंदिरों पर काफी भीड़ रही।
नगर के दुर्गा मंदिर, मां मंगला देवी मंदिर, मां रक्षा देवी मंदिर, मां दक्षिणेश्वरी मंदिर, कंजा बरमबाबा देवस्थान सहित पौराणिक शिव मंदिर में भक्तों ने कन्याभोज और भंडारा कराकर प्रसाद वितरित किया। घरों में हवन पूजन के बाद भक्तों ने कन्याओं को भोज कराकर दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता लग गया। देवी मंदिरों में ढोल, मजीरे के साथ महिलाओं ने देवी भजन गाकर देवी मां का गुणगान किया। 
इस मौके पर अहमदनगर, दतेली, संसारपुर, मूड़ासवारान, अलीगंज, अजान, कुकरा, पिपरियाधनी, पिपरिया कप्तान, बेलवा, बेलहरी सहित देवी मंदिरों में काफी भीड़ रही।
ममरी। चैत्र नवरात्र व्रत समापन पर देवी मंदिरों, गांव के देवी स्थानों पर हवन, आहुति कन्याभोज का सिलसिला जारी रहा। भक्तों ने हवन में आहुतियां डालकर मातारानी सिद्घिदात्री का विधिविधान से पूजन कर कन्याओं को भोजन कराया। रोशननगर में दुर्गा माता मंदिर पर चल रहे शतचंडी यज्ञ की पूर्णाहुति कन्या भोज भंडारे के साथ समापन हो गया। यज्ञाचार्य अशोक कुमार तिवारी ने मंदिर पुजारी जैजैराम कुशवाहा, आयोजक बिजेंद्र सिंह, सुरेश बाजपेई, चंद्रकांत त्रिपाठी, उमाशंकर आदि ने आहुतियां डलवा यज्ञ का समापन किया।
रजागंज। खजुहा के मां भगवती, करनपुर के मां दुर्गा, रजागंज के मां काली मंदिर में रामनवमी पर भक्तों ने पूजन अर्चन कर कन्याभोज कराया।
बांकेगंज। नवरात्र के अंतिम दिन भक्तों ने घरों और देवी मंदिरों में सिद्घिदात्री देवी की आराधना और कन्याभोज के बाद व्रत का पारण किया। तमाम भक्त मंदिरों में सामूहिक हवन में शामिल हुए। भक्तों ने मां के चरणों में माथा टेक कर मंगलमय जीवन की कामना की।
खमरिया। नवरात्र के मौके पर 20 वर्षों से निरंतर प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति के सामने नित्य होने वाले 24 हजार अखंड गायत्री महामंत्र जप की सूक्ष्म ऊर्जा वाली नौ कुंडीय यज्ञशाला में दीपयज्ञ भी हुआ। शक्तिपीठ की व्यवस्थापिका डॉ. रामजानकी देवी वर्मा ने बताया लोक श्रद्धा के अनुसार नवरात्रि और मांगलिक अवसरों पर श्रद्धालु अखंड ज्योति से ज्योति प्रज्वलित करके अपने घरों में स्थापित कर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। 
बिजुआ। नवरात्र के समापन और श्री रामनवमी के मौके पर यहां कई धार्मिक कार्यक्रम हुए।
बिजुआ के प्रसिद्ध मंदिर हरदेव लला पर नौ दिन से चल रहे कार्यक्रम में झांकियां प्रस्तुत की गईं। इसके अलावा गुलरिया चीनी मिल के अधिशासी अधिकारी एनके अग्रवाल की मौजूदगी में धार्मिक कार्यक्रम हुआ। पं. रिषीदेव तिवारी ने हवन पूजन सम्पन्न कराया।
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नवरात्र समापन हुई बरोसी पूजा
बरवर। नगर के देवीस्थान स्थित मां दुर्गा मंदिर पर नवरात्र समापन पर हवन पूजन और बरोसी पूजा संपन्न हुई। पंडित प्रेमबाबू शास्त्री, ने हवन पूजन तथा जलती बरोसी लेकर मुरादपुर गांव के कल्लू पंडा ने पूरे नगर का भ्रमण किया। ग्रामीणों ने बताया कि बरोसी पूजा की शुरुआत एक बार नगर में लाल बुखार तथा महामारी फैली तब विद्वान पंडित शास्त्री स्वरूप द्वारा हवन पूजन कराया था। इसके बाद नगरवासी महामारी से बचे तब से लगातार यह पूजा वर्ष में दो बार कराई जाती है। मेले को देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। अत्यधिक भीड़ होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था में कई थानों की पुलिस तथा पीएसी मेले में तैनात रहती है।
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