आसमान में छाए बादलों और सर्द हवाओं के कारण तराई में शीत लहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को भी बादल छाए रहने से सूरज के दर्शन नहीं हो पाए। उधर बर्फीली हवाओं ने लोगों को कंपा कर रख दिया। भारी भरकम गर्म कपड़ों से लैैस होने के बाद भी लोगों की कंपकंपी छूट रही थी। जगह-जगह लोग अलाव के सहारे अपने बदन को गर्म करने की कोशिश करते रहे। बीमार और बुजुर्ग दिन भर घरों में दुबके रहे।
पिछले पांच दिनों से चल रहे शीत लहर में लगातार इजाफा होता जा रहा है। तापमान में भी निरंतर गिरावट आ रही है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 14 डिग्री और न्यूनतम तापमान 04 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे, इसके चलते दिन भर लोगों को गुनगुनी धूप नहीं मिल पाई। दिन भर चली बर्फीली हवाओं से हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने लोगों को बेहाल कर दिया। शीतलहर के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त रहा।
गत 18 जनवरी से ठंड में बढ़ोतरी जारी है। आने वाले हर दिन पिछले दिन की अपेक्षा अधिक ठंडा साबित हो रहा है। गुरुवार की शाम तो ये आलम था कि शाम सात बजे के बाद ही सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। शुक्रवार को मौसम और ज्यादा तल्ख हो गया। बादलों ने दिन भर सूरज को अपनी ओट में छिपाए रखा। दिन भर लोग धूप को तरस गए। सर्द हवाओं ने हालत को और बिगाड़ कर रख दिया। भीषण सर्दी से लोग बुरी तरह बेहाल रहे।
शीत लहर खानाबदोश जिंदगी गुजारने वाले लोगों, बाढ़, कटान से विस्थापित पीड़ितों, मजदूरों पल्लेदारों और रिक्शा चालकों पर काफी भारी पड़ रही है। सर्दी के कारण उन्हें काम मिलने में दिक्कत आ रही है। वे सड़क किनारे, चौराहों और मालगोदाम पर धान की भूसी और कूड़ा करकट आदि इकट्ठा कर अलाव जलाकर किसी तरह अपना समय काट रहे हैं। शीत लहर से बचाव के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। शहर में सरकारी स्तर से न तो कहीं अलाव जलते नजर आ रहे हैं न ही कंबलों का वितरण किया जा रहा है। इससे जरूरतमंदों को सर्दी काटना मुश्किल हो रहा है।
सिकंद्राबाद। क्षेत्र में शीत लहर के कारण जनजीवन बुरी तरह अस्तव्यस्त हो गया है। मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। ठंड बढ़ने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले दिनों तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने से गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। हाल की बूंदाबांदी से फसलों को काफी फायदा पहुंचा है।