लखीमपुर खीरी। दहेज के लिए विवाहिता को मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे शैलोज चंद्रा ने हत्यारोपी पति और दो भाइयों को दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 45 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए बताया गया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम संकल्पा निवासी राजेश मिश्रा के साथ शहर के गोट्टैया बाग निवासी माधुरी की शादी 1993 में हुई थी। शादी के बाद से ही उसे मोटरसाइकिल की मांग को लेकर परेशान किया जाने लगा। एक बार मारपीट कर उसकी टांग भी तोड़ दी गई।
आठ दिसंबर 1998 को जली हुई दशा में माधुरी ससुराल में मिली। उसे इलाज के बाद भी बचाया नहीं जा सका। इस मामले में वादी प्रताप शंकर अवस्थी ने राजेश मिश्रा, ससुर लाल बहादुर, जेठ दिनेश कुमार और राजेंद्र कुमार के साथ ही ससुर लालबाबू मिश्र, सास बिट्टा देवी और जेठानी सहित कई रिश्तेदारों को नामजद किया।
27 साल तक चली मुकदमेबाजी का फैसला शुक्रवार को आया। एडीजे शैलोज चंद्रा ने पति राजेश मिश्र, उसके भाई दिनेश तथा राजेंद्र को दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 45,000 रुपये जुर्माना लगाया। इस मामले में सास बिट्टा देवी और ससुर लाल बाबू मिश्र की मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है। अन्य अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।