सेटेलाइट के जरिए बाघिन की निगरानी करती रेस्क्यू टीम। स्रोत : वन विभाग।
बांकेगंज। दुधवा जंगल से निकलकर डीटीआर बफरजोन पलिया रेंज आबादी के आसपास गन्ने के खेतों में पहुंची हमलावर बरौंछा की बाघिन 17 दिन बीतने के बाद भी पकड़ी नहीं जा सकी। वहीं, वन कर्मी सिर्फ निगरानी तक सीमित हैं।
वन विभाग की रेस्क्यू टीमों और हमलावर बाघिन के बीच लुकाछिपी का खेल जारी है। हाल ही में हुई बारिश और गन्ने के खेतों में भरा पानी भी उसे पकड़ने में बाधा डाल रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी डॉ. एच राजामोहन ने उच्चाधिकारियों से उसे पकड़ने के लिए बीते दिनों अनुमति ली थी। आबादी की ओर रुख न कर सके, इसके लिए बाघिन के गले में कॉलर लगाया गया।
सेटेलाइट और ड्राेन के जरिये गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जालीदार ट्रैक्टर से कॉम्बिंग के साथ ही प्रभावित क्षेत्र में छह कैमरे और दो पिंजरे लगाकर बकरी बांधी गई है। इसके बावजूद वन विभाग के हाथ खाली हैं।
21 दिन पहले जंगल से निकलकर आबादी क्षेत्र के गजरौला, ऐंठपुर और कंपनी फार्म के आसपास 7 सितंबर को पहुंची हमलावर बाघिन ने एक पालतू भैंस और दो बकरियों पर हमला कर निवाला बनाया। निगरानी टीमों के खदेड़ने पर वह फिर गन्ने के खेतों में छिप गई।
20 किलोमीटर के दायरे में वह ठिकाना बदल कर एक से दूसरे खेत में भ्रमण कर रेस्क्यू टीमों को लगातार चकमा दे रही है। हाल ही नगला गांव के आसपास गन्ने के खेतों में दो जंगली सूअर का शिकार किया और वहां भरा पानी पिया। लगाए गए कैमरा और पिंजरा के पास फटकी नहीं।
वर्जन
गन्ने के खेतों में भरा पानी और लगातार ठिकाना बदलने से उसे रेस्क्यू करने में दिक्कत आ रहा रही है। बाघिन को पकड़ने का अभियान लगातार जारी है। निगरानी टीमों को उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व