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खीरी तक पहुंची जांच की आंच

Sun, 03 May 2015 06:55 PM IST
लखीमपुर खीरी
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एसटीएफ की जांच में बिजली अधिकारियों की आईडी से बिजली बिलों में हुए करोड़ों रुपये की घपले की जांच खीरी जिले तक पहुंच गई है। लखीमपुर और गोला डिवीजन में वर्ष 2012 से (तब से ऑनलाइन हुआ) रिवीजन के दौरान पांच हजार से कम किए गए बिजली बिलों की जांच को कहा गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि दोनों डिवीजनों में ऐसे करीब पांच हजार बिजली बिल हैं, जिनकी जांच की जानी है।
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एसटीएफ की जांच में रोज हो रहे नए खुलासों को देखते हुए पावर कारपोरेशन ने भी अधिशासी अभियंताओं और सहायक अभियंताओं से अपनी आईडी की जांच कर एक महीने के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है। एक अधिकारी ने बताया कि पूर्वांचल में निजी कंपनियों द्वारा बिजली बिलों में घपला किए जाने का मामला उजागर होने और एसटीएफ की जांच को देखते हुए पावर कारपोरेशन भी अपने स्तर पर जांच करा रहा है। जिस भी अधिकारी ने बिजली बिलों का रिवीजन किया है, जांच में उसकी तस्दीक हो जाएगी। अगर किसी बिल को फर्जी तरीके से रिवीजन किया गया है तो वह भी पकड़ में आ जाएगा। सूत्रों का कहना कि पिछले गोला डिवीजन के कई बिजली अधिकारियों की आईडी एक हफ्ते तक ब्लॉक कर दी गई थी। हालांकि पिछले दो दिनों से सिर्फ आनॅलाइन बिल जमा किया जा रहा है। बिजली बिलों के रिवीजन का काम रोक दिया गया है।
लखीमपुर और गोला भी संदेह के घेरे में
वैसे तो पूरे प्रदेश में बिजली बिलों की जांच को कहा गया है, लेकिन जिले के दोनों डिवीजन पहले से ही संदेह के घेरे में रहे हैं। कई बार बिजली बिलों में घपलेबाजी का मामला सामने आ चुका है, लेकिन कभी गहनता से जांच नहीं हुई। इस बार पावर कारपोरेशन के निर्देश पर शुरू की गई जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने की उम्मीद है। सूत्रों का कहना है कि खीरी जिले में एक-एक लाख या उससे ज्यादा के बिजली बिलों में काफी गड़बड़ियां की गई हैं।
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अधीक्षण अभियंता सीतापुर सर्किल जेबी सिंह ने बताया कि एसटीएफ की जांच में बिजली बिलों में गड़बड़ी सामने आने के बाद पावर कारपोरेशन ने प्रदेश भर जांच कराने को कहा है। सभी अभियंताओं से (जिन्हें आईडी जारी है) ऑनपलाइन बिलों की एक माह में जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इससे फर्जी आईडी का पता चल जाएगा। इसी क्रम में जो अधिकारी अपनी तैनाती के बाद स्थानांनतरित हो चुके हैं, उनकी आईडी बंद की गई थी।
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