बिना डिग्री के झोलाछाप डॉक्टरी करने और जबरन आपरेशन करते हुए विवाहिता को मौत के घाट उतारने के मामले में अपर जिला जज एमजी मदार ने आरोपी को दस वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कफील अहमद अंसारी ने बताया कि सिंगाही कस्बे में सोमेश प्रकाश श्रीवास्तव ने बिना किसी डिग्री, डिप्लोमा के क्लीनिक खोल रखा था। पांच सितंबर 2001 को कस्बे के रहने वाले फिदा अली की पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो उसने क्लीनिक पर अपनी पत्नी को दिखाया। आरोप है कि परिवार वालों से पूछे बिना ही झोलाछाप डॉक्टर ने फिदा अली की पत्नी का लापरवाही पूर्वक आपरेशन कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस बीच नवजात को भी गायब कर दिया गया, परिवार वालों के हंगामे के बाद जब पुलिस हरकत में आई तो कथित चिकित्सक की निशानदेही पर अगले दिन नवजात की लाश भी बरामद हुई थी। मामले की सुनवाई शुरू हुई तो घटना के गवाह नूर मोहम्मद व सत्तार पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गए लेकिन अदालत में फिदा अली, अब्दुल हसन, शौकत, डॉ.बद्रीश और एसआई अच्छेलाल सरोज ने डटकर गवाही दी। सुनवाई पूरी करते हुए अदालत ने झोलाछाप डॉक्टर सोमेश प्रकाश को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।