नगर के निकटवर्ती गांव कालीचरनपुर के तीन मजदूरों की ट्रैक्टर और ट्रॉली के पलटने से दबकर मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद गमगीन माहौल में मजदूरों का अंतिम संस्कार कर किया गया। बाप के कंधों पर निकलीं कमाऊ बड़े बेटों की अर्थियों को देखकर पूरा गांव रो उठा।
कोतवाली क्षेत्र के गांव कालीचरनपुर के तीन मजदूर विपत (35), पिंकू (22) और अरुण (18) पांच और छह जनवरी की रात रोजी कमाने के लिए अलीगंज रोड के एक भट्ठे से ट्रैक्टर से जुड़ी ट्रॉली में ईंटे भरकर पलिया के लिए निकले थे। मूड़ा सवारान के पास अल्पिका नहर की पुलिया पार करते समय मोड़ पर ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी से भरी नहर में पलट गई थी, जिसके नीचे दबकर तीनों मजदूरों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को विपत और पिंकू का अंतिम संस्कार गांव के दक्षिण मरघट में कर दिया गया। अविवाहित अरुण का शव गांव के पास जंगल में दफनाया गया है। गांव से एक साथ बूढ़े बाप के कंधे पर निकली बड़े और कमाऊ बेटों की अर्थियों को देखकर पूरा गांव रो पड़ा।
... उठानी पड़ी लाडलों की अर्थी
दुर्घटना में मारे गए तीनों मजदूरों का अंतिम संस्कार उनके बूढ़े बाप ने किया है। जिस बाप के कंधों पर कभी इन बेटों ने बचपन बिताया था लेकिन बेरहम किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, आज उन्हीं कंधों पर बाप को अपने लाडलों की अर्थी उठानी पड़ी है। उसी दुखी पिता कमलू ने मृतक विपत, छोटेलाल ने मृतक पिंकू का अपने कांपते बूढ़े हाथों से अपने जवान बेटे का अंतिम संस्कार किया। जबकि मृतक अरुण को उसके पिता रामऔतार ने मिट्टी दी।
विधायक रोमी साहनी ने दिए 15 हजार
दुर्घटना में मारे गए तीनों युवकों की मौत पर उनकी शवयात्रा में शामिल होने के लिए क्षेत्र के तमाम राजनीतिक एवं जनप्रतिनिधि पहुंचे। पलिया विधायक रोमी साहनी ने मृतकों के परिवार वालों को 15 हजार रुपये की सहायता राशि दी। साथ ही उनके घर जाकर दुखी परिवार को ढांढस बंधाया। शव यात्रा में पूर्व विधायक अरविंद गिरि, पूर्व ब्लाक प्रमुख हादी हसन खां, जफर उल्ला खां, नदीम खां, शिवनंदन वर्मा, हरिनंदन वर्मा, नरेश सिंह भदौरिया, प्रधान अमित कुमार, विनय पांडे, अनुपम वाजपेयी, राजेश वर्मा, बालगोविंद वर्मा, राकेश वर्मा, पवनेश वर्मा, पृथ्वीपाल, विनोद गौतम आदि शामिल हुए।
कोई अधिकारी नहीं पहुंचा
गरीबों की मौत पर सहायता तो दूर जिले का कोई अधिकारी शोक संवेदना तक व्यक्त करने नहीं पहुंचा। इन भूमिहीन मेहनतकश मजदूर मृतकों के पास सरकारी सुविधा के नाम पर एपीएल कार्ड के अलावा कुछ भी नहीं है। उनके घरों के टूटे छप्पर इनकी गरीबी और लाचारी बयां कर रहे हैं।