फसल बर्बाद होने और कर्ज के कारण आत्महत्या करने या सदमे से मृत किसानों के परिवार को समाजवादी पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा। शासन ने इस संबंध में आवश्यक संशोधन कर शासनादेश जारी किया है, जिसमें ग्रामीण इलाकों के लिए निर्धारित प्राथमिकताआें में छठवें स्थान पर रखा गया हैै तो शहरी क्षेत्र में इसे सातवें स्थान पर प्राथमिकता मिली है।
समाजवादी पेंशन योजना के तहत पहले भूमिहीन, विकलांग मुखिया, विधवा मुखिया, हाथ से मैला ढोने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और पुनर्वास अधिनियम 2013 के तहत चिह्नित स्वच्छकारों, विकलांग बच्चों के परिवार के मुखिया और एचआईवी पीड़ितों को लाभ मिल रहा था। इस वर्ष अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों से आहत दर्जनों किसानों ने आत्महत्या की या फिर सदमे से मर चुके हैं। इनके परिवारों को राहत देने के लिए शासन ने समाजवादी पेंशन योजना में इन्हें भी शामिल किया है। प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने संशोधित शासनादेश जारी कर दिया है, जिसमें निर्र्धारित प्राथमिकताओं में किसानों के परिवारों को पात्रता के आधार पर शामिल किया है।
प्रशासन के पास मौजूद नहीं डेटा
संशोधित शासनादेश के साथ ही स्पष्ट हो गया है कि शासन ने फसल बर्बादी और कर्जे से परेशान होकर किसानों की आत्महत्या या सदमे से मौत होना मान लिया हैै, जबकि जिला प्रशासन ने अब तक शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में इन मौतों का जिक्र नहीं किया है। लिहाजा प्रशासन के पास ऐसे मरने वाले किसानों को डेटा मौजूद नहीं है।
प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि शासनादेश के अनुरूप लाभार्थियों के चयन कराने के निर्देश बीडीओ समेत ब्लाकस्तरीय अधिकारियों को दिए गए हैं। आत्महत्या और सदमे से मरने वाले किसानों के परिवारों को पेंशन का लाभ देने के लिए आवेदन पत्र मांगे गए हैं। सर्वे कराकर पात्र लाभार्र्थियों का चयन कराया जाएगा।