मैगलगंज। पिछले दो महीने में टमाटर की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की उम्मीदें तोड़ दी हैं। फरवरी में जहां टमाटर 50 से 60 रुपये किलो तक में बिक रहा था, अब वही टमाटर मंडियों में दस रुपये किलो तक आ गया है। किसानों को उनकी फसल की लागत तक वापस नहीं मिल रही, जिससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
नहीं निकल रही लागत
टमाटर की फसल में खाद, बीज, पानी, दवाई, मजदूरी और मंडी तक ढुलाई का खर्च मिलाकर लागत करीब 10 रुपये प्रति किलो से अधिक पड़ती है। बाजार में 10 रुपये किलो का दाम मिल रहा है।
हरी मौर्य, ग्राम लिधियाई
जनवरी की शुरुआत में टमाटर के दाम अच्छे थे। लगभग एक बीघे में टमाटर लगा दिया, लेकिन टमाटर तैयार हो पाता तब तक उसका भाव 5 से 10 रुपये किलो रह गया। ऐसे में क्या मंडी लें जाएगें और क्या लागत निकालेंगे।
मनोज मौर्य, किसान
टमाटर की आवक बिल्कुल बंद हो गई है। कारण है कि अधिकतर किसानों ने टमाटर के पेड़ों को खेत में ही जुतवा दिया। क्योंकि टमाटर को खेत से मंडी में लाने के लिए लगभग 20 रुपये किलो का खर्चा आता है। जब टमाटर का रेट 10 रुपये किलो है, तो ऐसे में किसान कैसे मुनाफा कमा पाएगा।
असलम, आढ़ती
किसान के साथ उन लोगों को भी नुकसान हुआ है, क्योंकि जब टमाटर में तेजी थी, तो हमने किसानों को एडवांस में रुपये दे दिए। अब टमाटर के भाव में मंदी आ गई।
बेताब, फुटकर सब्जी व्यवसायी
मैगलगंज में लगी सब्जी की दुकान। संवाद
मैगलगंज में लगी सब्जी की दुकान। संवाद
मैगलगंज में लगी सब्जी की दुकान। संवाद
मैगलगंज में लगी सब्जी की दुकान। संवाद