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प्रदूषण से उल्ल और कंडवा नदी का अस्तित्व संकट में

Fri, 14 Jul 2017 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर/महेवागंज (खीरी)।
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गंगा नदी - फोटो : अमर उजाला
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कार और अदालत की सख्ती के बाद भी नदियों में गिर रहे नाले, प्रशासन बेखबर 
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शहर के पास से निकली हैं दोनों नदियां
 एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के गंगा नदी को लेकर दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद भी अन्य नदियों की दशा में सुधार होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। जिले में शारदा, घाघरा, गोमती, सरयू, उल्ल, कंडवा, जुनई, सुहेली और मुहाना समेत कई नदियां हैं, जिनमें न सिर्फ प्रदूषण की भरमार है बल्कि अतिक्रमण का शिकार भी हो रही हैं। इसी तरह शहर से सटी उल्ल और कंडवा नदी पर प्रदूषण और गंदगी के कारण अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
शहर की लाइफलाइन उल्ल नदी और पौराणिक लिलौटी नाथ धाम के पास स्थित कंडवा नदी प्रदूषण के मामले में सबसे ऊपर है। उल्ल नदी के आसपास कचरे को डाला जा रहा है। शहर का टनो कचरा प्रतिदिन उल्ल नदी व इसके आसपास बिछाया जा रहा है। उल्ल में धोबीघाट भी लगता है। कपड़े धोने के काम आने वाला रसायन भी पानी में घुल रहा है। इतना ही नहीं नदी के समीप कुछ लोगों द्वारा पक्का निर्माण भी कराया गया है। इससे नदी का अतिक्रमण होने के साथ ही उसकी भौगोलिक रूपरेखा भी गड़बड़ा रही है। उधर कंडवा नदी की बात करे तो इसमें एक मिल का सीवर पाइप ही बिछा दिया गया है। पाइप के जरिये रोजाना हजारों लीटर प्रदूषित रासायनिक पदार्थ नदी में खपाया जा रहा है। इसकी सहायक जुनई नदी भी प्रदूषण की मार झेल रही है। नदी का पानी जहरीला होने से जलीव जीवो पर भी खतरा मंडरा रहा है। साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है।
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मर चुकी है कई भैंस
कंडवा नदी के जहरीले पानी का आलम यह है कि कुछ साल पहले नदी में पानी पीने उतरी राजकीय कृषि पर क्षेत्र मंझरा के डेयरी अनुभाग की दर्जनों भैंस नदी में ही छटपटा कर मर गई थी। 
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जिले की नदियों में प्रदूषण की स्थिति बहुत ज्यादा नहीं है, फिर भी संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। यदि कहीं प्रदूषण की स्थिति मिलती है तो कार्रवाई भी होगी।
आकाशदीप, डीएम
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