धौरहरा क्षेत्र में कटान करती हुई नदी।
लखीमपुर खीरी। धौरहरा तहसील के गुलरिया तालुके अमेठी, अग्घरा और परौरी गांव को बचाने को घाघरा नदी के किनारे 5.68 करोड़ की लागत से बनाया गया तटबंध पहली बारिश भी नहीं झेल पाया। बंधा बनाने को लगाई गईं रेत की बोरियां बारिश के बाद घाघरा नदी के तेज बहाव में बहने लगी हैं। इससे बचाव कार्यों पर सवाल उठे हैं।
बाढ़ खंड की ओर से बनाई गई बचाव परियोजना का शुभारंभ धौरहरा विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने भूमि पूजन कर किया था। कहा था कि इस बांध से गांवों को कटान से बचाया जा सकेगा। मगर, अब तटबंध में लगी रेत भरी बोरियां जलस्तर बढ़ते ही घाघरा नदी में समाने लगी हैं। नदी का बढ़ता जल स्तर देख ग्रामीण भयभीत हैं।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य अय्यूब अली, मुन्ना, तेजनरायन, रामचंद्र आदि ग्रामीणों ने इस परियोजना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिओ बैग की जगह प्लास्टिक के बैग में मिट्टी भरकर बांध किनारे लगाया गया। इस वजह से जब घाघरा नदी में उफान आया तो बोरियों में भरी मिट्टी नदी में चली गई। अगर समय रहते बचाव कार्य नहीं किया तो गुलरिया गांव नदी में समाने का खतरा है।
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वर्जन
गुलरिया तेलिहाघाट परियोजना पर काम चल रहा है। जेई पीडी गौतम मौजूद हैं। कुछ बोरियां नदी में खिसक गई थीं, इससे दरारें आई है। इसे ठीक किया जा रहा है।
- अजय कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड शारदा नगर