प्रत्याशियों के प्रचार पर पड़ी मार, होर्डिंग-बैनर के ऑर्डरों में आई गिरावट
कैश की कमी के चलते इस बार वाल पेंटिंग भी नहीं करा सके प्रत्याशी
अक्तूबर में था प्रचार सामग्री बनवाने पर जोर, नवंबर से लग गया ब्रेक
जो काम पिछले चुनावों में निर्वाचन आयोग की प्रचार व्यय की सीमा कर पाती थी और न सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार सामग्री न लगाने के दिशा-निर्देश, वह इस बार नोटबंदी करती दिखाई दे रही है। चुनाव की घोषणा और प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार शुरू होने के बावजूद अगर शहर-देहात की दीवारें इस बार अपेक्षाकृत साफ-सुथरी दिखाई दे रही हैं तो इसका श्रेय नोटबंदी को दिया जा सकता है। चुनाव सामग्री तैयार करने वाले कारोबारियों को दिए गए ऑर्डरों से भी इसकी पुष्टि हो रही है। ये कारोबारी इस बार उम्मीद के मुताबिक प्रत्याशियों से ऑर्डर न मिलने से काफी मायूस हैं।
नोटबंदी का साफ असर चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर पर पड़ता दिख रहा है। प्रचार सामग्री बनाने वाले कारोबारियों के मुताबिक अक्तूबर तक जिस रफ्तार से राजनीतिक दलों के होर्डिंग और बैनर बनाने के ऑर्डर मिल रहे थे, नवंबर से उन पर एकाएक ब्रेक लग गया है। पुराने चुनावों में महीना-दो महीना पहले ही प्रत्याशी युद्धस्तर पर वाल पेंटिंग कराना शुरू कर देते थे लेकिन कैश की कमी के चलते वे इस बार ज्यादा वॉल पेंटिंग भी नहीं करा पाए। इसका असर यह है कि इक्का-दुक्का जगह छोड़कर इस बार शहर-देहात की दीवारें साफ-सुथरी दिखाई दे रही हैं।
सस्ती प्रचार सामग्री चाहते हैं प्रत्याशी
चुनाव प्रचार के लिए बैनर-होर्डिंग और पोस्टर बनाने वाले कारोबारियों का कहना है कि जिन प्रत्याशियों के उन्हें अभी तक ऑर्डर मिले हैं, उन्होंने अपने चुनाव प्रचार का बजट सीमित कर दिया है। पिछले चुनावों में प्रत्याशी प्रचार में बढ़त लेने के लिए हाथ खोलकर ऑर्डर देते थे लेकिन इस बार ज्यादातर प्रत्याशी चाहते हैं कि कम से कम पैसे में चुनाव सामग्री तैयार हो। इसी कारण इस बार महंगे होर्डिंग और बैनर के बजाय वे कागज के पोस्टरों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। चुनाव का खर्च सीमित करने के लिए वे प्रचार के सस्ते तरीके ढूंढ रहे हैं।
20 फीसदी रह गया प्रचार सामग्री का कारोबार
शहर में चुनाव सामग्री का निर्माण करने वाले कुछ कारोबारियों का कहना है कि अक्तूबर में जिस तेजी से चुनाव लड़ने के दावेदार चुनाव प्रचार सामग्री तैयार करा रहे थे, नवंबर में नोटबंदी के बाद इसमें इतनी कमी आई कि यह कारोबार घटकर बमुश्किल 20 फीसदी रह गया। चुनाव की घोषणा के बाद भी काम अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सका है। इस बार जो आर्डर मिल रहे हैं, वह पिछले साल की तुलना में काफी कम हैं। होर्डिंग और बैनर तैयार करने वाले मोहम्मद उस्मान को आशंका है कि नोटबंदी का बड़ा असर इस बार उनके धंधे पर पड़ सकता है।
सपा की प्रचार सामग्री पर मुलायम की तस्वीर से परहेज
समाजवादी पार्टी ने जिले काफी पहले अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए थे लेकिन पार्टी में चल रहे दंगल के कारण सभी उम्मीदवार अभी तक असमंजस की स्थिति में हैं। सपा के उम्मीदवार जो पोस्टर छपवा रहे हैं, वे शिवपाल यादव की तस्वीर से तो पहले ही परहेज कर रहे हैं, अब मुलायम की तस्वीर छपवाने से भी परहेज किया जा रहा है। सपा में दो फाड़ होने से पहले जरूर कुछ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुलायम सिंह के फोटो छपवाए थे। होर्डिंग और बैनर कारोबारियों का कहना है कि चुनाव की घोषणा होने के बाद भी सपा उम्मीदवारों के आर्डर काफी कम मिले हैं। जो आर्डर मिले हैं उनमें केवल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम और फोटो छापने को कहा गया है। चुनाव चिह्न को लेकर सपा उम्मीदवारों में संशय बरकरार है। कुछ प्रत्याशी तो साइकिल चुनाव निशान छपवा रहे हैं लेकिन अधिकतर उम्मीदवारों ने चुनाव निशान पर निर्णय होने के बाद उसे प्रचार सामग्री पर इस्तेमाल करने की हिदायत दी है।