लखीमपुर खीरी। फैमिली आईडी को लेकर शासन स्तर पर गंभीरता दिखाई जा रही है, लेकिन जनपद में अभियान अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
लक्ष्य के सापेक्ष अब तक केवल 34.11 प्रतिशत परिवारों की ही फैमिली आईडी बन सकी है। मामले में सीडीओ ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को चेतावनी दी है। जिले में कुल 2,01,103 परिवारों की फैमिली आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके सापेक्ष अब तक 68,590 परिवारों की ही आईडी बनाई जा सकी है। अब भी 1,32,513 परिवारों की फैमिली आईडी बननी बाकी है, जो कुल लक्ष्य का करीब 65.89 प्रतिशत है।
फैमिली आईडी बनाने में नौ विभागों की लापरवाही सामने आई है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है। पंजीकृत श्रमिक और स्वयं सहायता समूहों में भी प्रगति बेहद धीमी है।
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योजना की जिले में ये है प्रगति
योजना-लक्ष्य-बने-प्रतिशत
किसान सम्मान निधि-100592-44379-44.12
मनरेगा मजदूर-27242-10840-39.79
वृद्धावस्था पेंशन-20208-5209-25.78
निराश्रित महिला पेंशन
20765-4686-22.57
दिव्यांग पेंशन
4751-
1973-
41.53
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास
276-
57
-20.65
मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास
96
-11
-11.46
पंजीकृत श्रमिक 37398
-3049-
8.15
स्वयं सहायता समूह
27269-
1446
-5.30
कुल
201103-
68590
-34.11
यह है फैमिली आईडी
फैमिली आईडी एक यूनिक पहचान संख्या होती है, जो किसी परिवार को सरकारी रिकॉर्ड में एक इकाई के रूप में पहचान देने के लिए बनाई जाती है। इसमें परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी एक साथ जुड़ी रहती है। जैसे कि परिवार के मुखिया का नाम, परिवार के सदस्यों की संख्या, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, पता, आय आदि की जानकारी होती है। राशन कार्ड भी एक फैमिली आईडी है।