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Lakhimpur Kheri News: हवाई यात्रा शुरू होने से जिले के विकास को लगेंगे पंख

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लखीमपुर खीरी।
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खीरी जिला अपने स्थापना दिवस 25 नवंबर के दिन ऐसे क्षण का साक्षी बना, जो आने वाले समय में यहां के विकास में अपनी भूमिका के लिए याद रखा जाएगा। सोमवार को पहली बार लखीमपुर महोत्सव का आयोजन शुरू हुआ। साथ ही जिले वासियों को हवाई सेवा के रूप में उपहार भी मिल गया। हवाई सेवा शुरू होने से जिले के संपूर्ण विकास को पंख लगेंगे।

अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व देश-विदेश के वन्यजीव प्रेमियों के बीच हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहा है। 884 वर्ग किलोमीटर में फैला दुधवा टाइगर रिजर्व का क्षेत्र साल के घने वनों और बड़े-बड़े घास के मैदानों से आच्छादित है। अभी तक दुधवा सड़क और रेल मार्ग से ही राजधानी लखनऊ व अन्य स्थानों से जुड़ा था, पर अब हवाई सेवा शुरू होने से यहां देश-विदेश के सैलानियाें का आना और भी आसान हो जाएगा।
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चूंकि पलिया भारत-नेपाल सीमा से लगा हुआ कस्बा है, ऐसे में यहां विमान सेवा शुरू होना और हवाई पट्टी को सुव्यवस्थित हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना सामरिक दृष्टिकोण से भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। संवाद

पर्यटन व होटल व्यवसाय में होगी वृद्धि

दुधवा टाइगर रिजर्व के चलते पास के कस्बा पलिया में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। यहां कई छोटे-बड़े होटल हैं। उच्च गुणवत्ता व सुविधाओं वाले होटलों की संख्या पांच से ज्यादा है। पलिया हवाई पट्टी से विमान सेवा शुरू होने से यहां देशी व विदेशी सैलानियों को आने में आसानी होगी तो उनकी संख्या भी बढ़गे। इससे पलिया व आसपास के पर्यटन व होटल व्यवसाय में वृद्धि होगी।

विभिन्न परियोजनाओं के संचालन व शोध कार्य में आएगी तेजी

पलिया से नियमित विमान सेवा शुरू होने के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व में शोध कार्यों में भी तेजी आएगी। यहां बाघ संरक्षण और गैंडा पुनर्वास परियोजना पहले से संचालित है। जिसको लेकर विशेषज्ञों का आवागमन रहता है। परिवहन संबंधी जो कठिनाई यहां पहले थीं, अब हवाई यात्रा सेवा शुरू होने से वह दूर होंगी। देश-विदेश के शोधार्थी व वन्यजीव विशेषज्ञ आसानी से यहां पहुंच पाएंगे।

थारू संस्कृति और हस्तशिल्प को मिलेगी पहचान
विमान सेवा शुरू होने से अब दुधवा में देशी-विदेशी सैलानियों की संख्या में इजाफा होगा, थारू संस्कृति और उनके हस्तशिल्प को भी नई पहचान मिलेगी। दुधवा क्षेत्र के करीब 39 राजस्व गांवों में 50 हजार से ज्यादा की थारू जनजाति की आबादी निवास करती है। थारू हस्तशिल्प को एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल किया गया है।
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पहली दिसंबर से नियमित उड़ानें शुरू होने की उम्मीद

भले ही सोमवार को पलिया से लखनऊ के बीच हवाई यात्रा की सेवा का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है, पर यह एक दिसंबर से नियमित होने की उम्मीद है। जिला प्रशासन का कहना है कि सप्ताह में चार दिन नियमित उड़ानें होंगी। इसमें दो दिन शनिवार और रविवार निर्धारित हो गए हैं, बाकी दो दिन भी जल्द निर्धारित कर आम यात्रियों के लिए बुकिंग शुरू की जाएगी।
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