बांकेगंज। पितृ पक्ष में पितरों की श्राद्ध तिथि याद नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित दिन पर श्राद्ध नहीं कर पाए हैं तो पितृ विसर्जन अमावस्या पर यह कर्म किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है।
छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पं. रामदेव मिश्र शास्त्री के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ विसर्जनी अमावस्या तक पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। जिन लोगों को पितरों की तिथि ज्ञात नहीं है, वे अमावस्या पर श्राद्ध कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि किसी कारणवश श्राद्ध न कर पाने पर ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। यदि इसकी व्यवस्था न हो सके तो पितरों के नाम पर गाय को घास खिलाई जा सकती है। घास उपलब्ध न होने पर दोनों भुजाएं उठाकर पितरों से प्रार्थना करने की भी मान्यता है।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, श्राद्ध कर्म मध्याह्न काल में करना चाहिए। पितृ पक्ष में तर्पण, अर्घ्य और पिंडदान को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।