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Lakhimpur Kheri News: गोशाला में बायोगैस प्लांट से बनने लगी बिजली, फैला उजियारा

Sun, 18 Jan 2026 11:40 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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बायोगैस प्लांट का निरीक्षण करते हुए एडीपीआरओ महेंद्र कुमार रजक। सोत स्वयं
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लखीमपुर खीरी। फूलबेहड़ ब्लाॅक के बसैगापुर ग्राम पंचायत की गोशाला में बने जनपद के पहले 140 घन मीटर बायोगैस प्लांट से बिजली बनने का काम शुरू हो गया। प्लांट से उत्पन्न बिजली से गोशाला में उजियारा फैलाया गया है। मोटर चलने से पानी की व्यवस्था भी हो गई है। इसके लिए पंचायत विभाग से 45 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया था।
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अब इस प्लांट से उत्पादित होने वाली बिजली से बिजनेस मॉडल के रूप में डिस्पोजल प्लेट व कटोरी का निर्माण होगा। साथ ही आटा चक्की, मोमबत्ती, मिनरल वाटर आदि में कोई एक या दो फैक्टरी स्थापित किए जाने की योजना है। गांवों व आसपास के क्षेत्र के हिसाब से यहां कौन सा काम शुरू किया जा सकता है, इसका मूल्यांकन व प्लांट का निरीक्षण करने के लिए दो दिन पहले शुक्रवार को अपर जिला पंचायत राज अधिकारी महेंद्र कुमार रजक फूलबेहड़ ब्लॉक के एडीओ पंचायत ओम प्रकाश भार्गव, सचिव, प्रधान के साथ यहां पहुंचे।
उन्होंने कुछ ग्रामीण व महिलाओं को प्लांट पर बुलाया और उद्योग संबंधित सुझाव लिए, ताकि जल्द ही नई दिशा में कदम बढ़ाया जा सके। एडीपीआरओ महेंद्र ने बताया कि प्लांट के निरीक्षण में टिनशेड सहित कुछ खामियां मिली हैं। व्यवस्थाएं दुरुस्त कराए जाने के लिए संबंधित सचिव को निर्देश दिए गए। संवाद
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महिलाओं को मिलेगा काम, दोगुनी होगी आय
-प्लांट की मदद से एक तरफ महिलाओं को गांव में रोजगार का अच्छा अवसर मिलेगा तो दूसरी तरफ इससे निकलने वाले खाद की बिक्री से भी महिलाओं की आय होगी। इसके अलावा बसैगापुर को बिजली वाले गांव के नाम से एक विशेष पहचान मिलेगी। बायोगैस प्लांट से रोजाना 15 केवीए बिजली बनती है, जो पर्याप्त मात्रा में है। इससे तेल कारखाना, आटा चक्की सहित कई प्लांट चलाए जा सकते हैं। काफी घरों को भी बिजली आपूर्ति दी जा सकती है।
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गोशाला से ही मिल जाता है गोबर
-बायोगैस प्लांट से बिजली बनाने के लिए रोजाना औसतन 500 से 600 किलो गोबर की जरूरत होती है, जो गोशाला से ही रोजाना मिल जाता है। बायोगैस प्लांट से सामान्य प्रक्रिया के तहत बिजली बनाई जा रही है। गोबर के अलावा कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं आता। इन दिनों ग्राम पंचायत इसका संचालन करती है। बाद में इसकी जिम्मेदारी समूह की महिलाओं को दी जाएगी।
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