सिंगाही। जौराहा नाले पर जारी खनन पट्टे के विरोध में किसानों का धरना दसवें दिन भी जारी रहा। इस बीच ठेकेदार की ओर से बालू निकासी के लिए डाले गए ह्यूम पाइप डालकर बनाया गया अस्थायी पुल और मशीनें रविवार को हटवा ली गईं। एक मांग पूरी होने और प्रशासन से खनन पट्टा निरस्त किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने सोमवार को धरना समाप्त करने का निर्णय लिया है।
तहसील निघासन की ग्राम पंचायत भेड़ौरा और मांझा के बीच बहने वाले जौरहा नाले पर प्रशासन ने खनन पट्टा जारी किया था। ठेकेदार ने बालू निकासी के लिए नाले पर ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी पुल बना दिया था। इससे नाले के प्रवाह और किसानों की खेती प्रभावित होने की आशंका जताते हुए ग्रामीणों और किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था।
पुल हटाने और खनन पट्टा निरस्त करने की मांग को लेकर किसान नेता लखीमपुर पहुंचकर डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल से भी मिले थे। डीएम के निर्देश पर गठित दो टीमें मौके पर निरीक्षण कर चुकी हैं। वहीं किसान और ग्रामीण बीते दो जनवरी से दिन-रात धरने पर बैठे हुए थे।
धरने के दबाव में रविवार को ठेकेदार ने ह्यूम पाइप डालकर बनाया गया अस्थायी पुल हटवा लिया। धरने का नेतृत्व कर रहे किसान नेता परमजीत सिंह ने बताया कि उनकी एक प्रमुख मांग पूरी हो गई है और अधिकारियों की ओर से खनन पट्टा निरस्त किए जाने का आश्वासन भी मिला है। इसी के चलते सोमवार को धरना समाप्त करने का फैसला लिया गया है।
इस संबंध में एसडीएम राजीव निगम ने बताया कि खनन पट्टा निरस्तीकरण की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। शासन से आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।