राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रथम चरण में हुए गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले करीब 10 से 12 परिवारों को कनेक्शन तो दे दिया गया, लेकिन पिछले आठ सालों से न तो मीटर रीडिंग हो पा रही है और न बिलिंग। इनमें सैकड़ों बिजली कनेक्शन ऐसे हैं, जिनकी फाइलें अभी तक डिवीजन दफ्तर में धूल फांक रही हैं। सूत्रों का कहना है कि बीपीएल कनेक्शनों की कई वर्षों से मीटर रीडिंग न होने से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को नहीं मिल पा रहा है।
बता दें कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत कार्यदायी संस्था (एलएनटी) ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों का निऱ्शुल्क बिजली कनेक्शन किया गया था और मीटर लगाए गए थे। योजना में तमाम गांव ऐसे थे, जहां उपभोक्ताओं को उनकी खपत से कई गुना का बिल थमा दिया गया, लेकिन तमाम उपभोक्ताओं के घरों में बिजली खपत की रीडिंग नहीं की गई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि योजना के शुरू में ही कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से गांवों में बिजली कनेक्शन कराए गए। ठेकेदारों ने उस समय विभाग को पात्रों के यहां कनेक्शन कर सूची सौंप दी, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही के कारण कनेक्शनों की बीसीडी नहीं भरी जिससे बिल नहीं बन रहे हैं। इससे सैकड़ों कनेक्शनों की फाइलें बिजली विभाग के डिवीजन दफ्तर में धूल फांक रहीं हैं।
टॉवरों की रीडिंग न होने से बकाएदारी बढ़ी
लखीमपुर विद्युत वितरण खंड प्रथम के ग्रामीण क्षेत्र में करीब 250 और शहरी क्षेत्र में करीब 100 टॉवर हैं। इन टॉवरों की रीडिंग नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। आंकड़ों पर गौर करें टॉवरों पर बिजली विभाग का करीब 80 लाख रुपये बकाया है। इस बार भी क्लोजिंग माह में टॉवरों से ज्यादा बकाया नहीं मिल पाया है।
एसडीओ आरबी सिंह राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत जो भी कनेक्शन हुए हैं, उन सभी कनेक्शनों के बिल जारी हो रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं को बिल नहीं मिल रहे हैं, वो सभी फर्जी हो सकते हैं। उन्हें विभाग में संपर्क करना चाहिए। वैसे भी विभाग में मीटर रीडरों की कमी है। टॉवर वाले अपनी रीडिंग देकर खुद ही बिल ले जाते हैं।