लखीमपुर खीरी के हटवा गांव में सीएम के न पहुंचने से भड़के किसान
ब्लॉक ईसानगर के गांव हटवा के कटान पीड़ितों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गांव में न आने से निराश होकर जल समाधि लेने की ठान ली और गुरुवार की सुबह छह बजे ही घाघरा नदी में उतर गए। जल समाधि लेने की चेतावनी देकर 30 लोग नदी में उतरे। इनमें जनकपुरवा के दो पीड़ितों समेत महिलाएं भी शामिल रहीं। जला समाधि लेने के लिए कटान पीड़ितों के नदी में उतरने की सूचना से प्रशासन में हड़कंप मच गया। दोपहर बाद एसडीएम, सीओ, तहसीलदार समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। किसी तरह समझाबुझाकर जल समाधि लेने गए पीड़ितों को नदी से बाहर निकाला। करीब 11 घंटे तक नदी में रहने से पांच महिलाओं की हालत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
गांव हटवा निवासी आनंद तिवारी की अगुआई में 70 वर्षीय जहूरा, 55 वर्षीय सुहरा, 50 वर्षीय जुगनू, 30 वर्षीय हसीना, 45 वर्षीय फातिमा, ज्ञान तिवारी, शिवराम, इकबाल, मेराज, रवीशंकर पांडे, रामसूरत, रामू, बेचेलाल, रामश्री, राजेश, साबिर और गांव जनकपुरवा के रामेश मौर्या व रमेश मौर्या गुरुवार की सुबह छह बजे एक साथ घाघरा नदी की धारा में खड़े होकर प्रदर्शन करते हुए जल समाधि लेने की चेतावनी देने लगे। दोपहर में किसी तरह इसकी सूचना तहसील प्रशासन को हुई, जिसके बाद अफरातफरी मच गई। सबसे पहले एसओ प्रमोद कुमार और नायब तहसीलदार अभिमन्यु वर्मा पहुंचे। इन लोगों ने आनंद तिवारी के सेलफोन पर वार्ता की, लेकिन उन्होंने समाधान कराने की मांग की और समाधान न होने पर जलसमाधि लेने की बात दोहराई। कटान पीड़ितों को अड़ता देख सीओ निष्ठा उपाध्याय और एसडीएम धौरहरा घनश्याम त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। पीएसी की फ्लड यूनिट और गोताखोर भी मौके पर बुला लिए गए। प्रशासन के मान मनौवल करने पर करीब 11 घंटे बाद सवा पांच बजे प्रदर्शन कर रहे कटान पीड़ित मान गए। तब एसडीएम के निर्देश पर फ्लड यूनिट और गोताखोर नाव व मोटरबोट लेकर गए। सभी को सकुशल नदी से बाहर निकाल लिया गया। नदी में 11 घंटे तक खड़े रहने से महिलाओं की हालत बिगड़ गई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए ईसानगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कटान पीड़ितों की मांगें
1. घाघरा नदी से होने वाला कटान तत्काल रोका जाए
2. कटान पीड़ितों को मुआवजा देने के साथ उन्हें बसाया जाए
3. गांव जाने के रास्ते में गड्ढे और कीचड़ हैं, जिसे दुरुस्त किया जाए
4. आवागमन के साधन दिए जाएं
महिलाओं की बिगड़ी हालत, आग जलाकर तपाया
घाघरा नदी की धारा में करीब 11 घंटे तक खड़े रहने से वैसे तो सभी की हालत बिगड़ गई, लेकिन महिलाएं जब नदी से बाहर निकलीं तो थर-थर कांप रहीं थीं। इस पर एसडीएम ने नदी किनारे ही आग जलवाई, जिसके पास कांप रहीं महिलाओं को बिठाया गया, आग से गर्मी लगने के काफी देरे बाद वह सामान्य हो सकीं।
सब कुछ हो गया खत्म, अब कोई रास्ता नहीं बचा था
कटान पीड़ितों अगुआई कर रहे आनंद तिवारी ने घाघरा नदी से निकलने के बाद बताया कि उन लोगों का सबकुछ खत्म हो चुका है। गांव में जाने का न तो रास्ता बचा है, न घर और मकान। कोई बीमार हो जाए तो पैसा न होने के कारण इलाज भी नहीं करा सकते। अधिकारी दो दिन पहले आए तो सीएम के आने की बात कह गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री आए तो उन्हें बरगला दिया गया। मुख्यमंत्री आए, लेकिन उन लोगों को फिरभी कोई राहत नहीं मिल सकी, जिससे निराश होकर अब यही सोच लिया था कि जल के कारण उनका सबकुछ खत्म हो गया, इसलिए अब जल में ही समाधि ले लेंगे। एसडीएम साहब के आश्वासन पर भरोसा है। यदि उन लोगों को मुआवजा न मिला और कहीं ऊंचे पर न बसाया गया तो वह फिर आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि कटान पीड़ितों को कोई कष्ट नहीं होना चाहिए। प्रशासन पीड़ितों को सभी सुविधाएं दिलाने के लिए कटिबद्ध है। हटवा के पीड़ितों को खाद्यान्न दिलाया जा रहा है। इसके अलावा पात्रों को अन्य सुविधाएं भी दिलाई जाएंगी। फिलहाल सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
घनश्याम त्रिपाठी, एसडीएम