शहर की ऐतिहासिक रामलीला के तहत बृहस्पतिवार को राम लक्ष्मण और सीता के वन गमन की लीला का मार्मिक मंचन किया गया। इससे पहले बुधवार शाम राम बारात निकली और रात में राम सीता के विवाह की लीला का मंचन किया गया। रामलीला के दौरान बुधवार को जहां आनंद का माहौल था वहीं बृहस्पतिवार को राम लक्ष्मण सीता के वन गमन की लीला देख दर्शन भाव विभोर हो उठे। उनकी आंखों से आंसू बह चले।
राम विवाह के बाद अयोध्या में राम के राजतिलक की तैयारियां चल ही रहीं थी कि मंथरा के बहकावे में आकर कैकेई ने राज दशरथ से दो वरदान मांग लिए। एक में भरत को राजगद्दी और दूसरे में राम को चौदह वर्ष का वनवास। इससे राजा दशरथ व्याकुल हो उठे लेकिन राम खुशी-खुशी वन जाने को तैयार हो गए। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन जाने को तैयार हो गए।
राम लक्ष्मण और सीता को वन जाते देख सारी अयोध्या नगरी में सन्नाटा छाया गया। जिसने सुना वही उन्हें देखने के लिए दौड़ा-दौड़ा चला आया। नगर वासियों ने राम को वन जाने से रोकने को काफी अनुनय विनय किया लेकिन उन्होंने विनम्रता पूर्वक नगरवासियों को समझा बुझा कर वापस कर दिया। राम लक्ष्मण और सीता को वन जाते देख लोगों की आंखों से आंसुओं का प्रवाह शुरू हो गया।
गोला में हुआ परशुराम-लक्ष्मण संवाद
गोला गोकर्णनाथ। मेला मैदान पर परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो उठे।
मेला मैदान पर दो अक्तूबर से शुरू हुए श्री रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन वृंदावन मथुरा के दाऊ दयाल आदर्श एकता मंडल के कलाकारों ने धनुष भंग और परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया। 7 अक्तूबर को यहां श्रीराम विवाह का मंचन किया जाएगा।
गंदगी और जलभराव के बीच हो रही रामलीला
गोला गोकर्णनाथ। नगर में एक सदी पार कर चुका रामलीला का आयोजन नगर और क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रहा है। इस बार श्री रामलीला का आयोजन गंदगी और जलभराव के बीच हो रहा है। रामलीला पंडाल, मंच के दोनों ओर जलभराव और गंदगी फैली हुई है, जहां दर्शकों को बैठने में भी दिक्कत हो रही है। जल निकासी का उचित प्रबंध न होने के कारण मेला मैदान के रामलीला परिसर में जलभराव के बीच रामलीला कमेटी ने कुछ हिस्से पर साफ सफाई और मिट्टी डलवाकर काम चलाने भर को स्थान निकाला है।