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छोटी काशी कॉरिडोर: प्रशासन ने रातोंरात ध्वस्त कराई बरेली धर्मशाला, पंडा बोले- सामान तक नहीं हटाने दिया

Sun, 22 Dec 2024 11:40 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

गोला गोकर्णनाथ में छोटी काशी कॉरिडोर निर्माण के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है। शनिवार रात बरेली धर्मशाला को ध्वस्त कर दिया गया। 
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मौके पर पड़ा मलबा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में छोटी काशी कॉरिडोर निर्माण के लिए प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार की रात शिव मंदिर के मुख्य मार्ग पर स्थित प्राचीन डॉ. बद्री प्रसाद बरेली धर्मशाला को ढहा दिया गया। इस दौरान लोगों में अफरा-तफरी मची रही। वहां के पंडों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। 

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शनिवार की रात देखते ही देखते शिव मंदिर मार्ग में वर्ष 1905 में निर्मित प्राचीन डॉ. बद्री प्रसाद बरेली धर्मशाला को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया। जहां विरोध होने की सुगबुगाहट थी, वहां कार्रवाई में किसी का तख्त टूट गया तो किसी का सामान मलबे के नीचे दब गया। रविवार की सुबह श्रद्धालु मलबे के ढेर के ऊपर से होकर शिव मंदिर जाते दिखे। इस कार्रवाई में बरेली, महादेवा गोस्वामी, रामपुर धर्मशाला और पांच आवासीय निर्माण सहित 11 भवन शामिल हैं।

सो रहे लोगों को जगाकर कर दी कार्रवाई
तीर्थ घाट के पंडा संजय शास्त्री ने बताया कि प्रशासन ने एकाएक कार्रवाई शुरू कर दी। जिसमें उनका तख्त टूट गया है। प्रशासन को कुछ मौका देना चाहिए था। इससे नुकसान से बचा जा सकता था। शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि अधिकारियों ने कुछ सुनने-समझने का मौका ही नहीं दिया। सो रहे लोगों को जगाकर कार्रवाई शुरू कर दी। सामान तक नहीं हटा पाए।

 

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रामकुमार ने कहा कि रात करीब दस बजे बरेली धर्मशाला तोड़ी जाने लगी। सबको तत्काल जाने के लिए कहा गया। धर्मशाला के मलबे में उनका सारा सामान दब गया है। धर्मराज गिरि ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय रामेश्वर गिरि के नाम मकान का दाखिल-खारिज है। एक हिस्से में वे और दूसरे हिस्से में उनके भतीजे सूरज गिरि और मनोज गिरि रहते हैं। मकान पर लाल निशान लगा दिया गया है। पुनर्वास और मुआवजा मिलेगा भी कि नहीं।

गर्भ गृह के परिक्रमा मार्ग से विस्थापित होंगे अन्य मंदिर
गोला गोकर्णनाथ में प्राचीन शिव मंदिर परिसर के अन्य मंदिरों को शिव मंदिर गर्भ गृह के परिक्रमा मार्ग से विस्थापित किया जाएगा। हालांकि प्राचीन बूढ़े बाबा मंदिर का स्थान नहीं बदला जाएगा। राजस्व विभाग ने शिव मंदिर कॉरिडोर निर्माण के लिए समेकित पर्यटन विभाग को 19,324.670 वर्ग मीटर भूमि दी है। कॉरिडोर के भव्य निर्माण के साथ शिव मंदिर परिसर के अन्य मंदिरों को भी विस्थापित करने की योजना बनाई गई है। 

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शिव मंदिर के मुख्य मार्ग में एक ओर मुगल शासन कालीन बूढ़े बाबा मंदिर ठीक सामने भगवान श्री गणेश और शिव मंदिर परिसर में माता पार्वती, भगवान नंदी, बजरंगबली, संतोषी माता, बाबा काल भैरव सहित छोटे बड़े अन्य 16 मंदिर हैं। 

इन मंदिरों को पौराणिक शिव मंदिर गर्भ गृह के परिक्रमा मार्ग से विस्थापित किया जाएगा। निर्माण कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के जेई विवेक बाजपेयी ने बताया कि अन्य सभी मंदिरों को परिक्रमा मार्ग में प्रतिष्ठित किया जाएगा। वहीं प्राचीन बूढ़े बाबा मंदिर को इस स्थान पर भव्य स्वरूप दिया जाएगा। 
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